नई दिल्ली। देश ने सोमवार को पूरे उत्साह और गर्व के साथ 77वां गणतंत्र दिवस मनाया। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य गणतंत्र दिवस परेड में भारत की सैन्य ताकत, सांस्कृतिक विविधता, लोकतांत्रिक मूल्यों और आत्मनिर्भर भारत की झलक एक साथ देखने को मिली। इस वर्ष का समारोह कई मायनों में खास रहा—जहां एक ओर ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने की गूंज सुनाई दी, वहीं दूसरी ओर मणिपुर की झांकी और ऑपरेशन सिंदूर की गर्जना ने परेड को ऐतिहासिक बना दिया।
कर्तव्य पथ पर भारत की विकास यात्रा का प्रदर्शन
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ को भव्य रूप से सजाया गया था। देश और दुनिया से आए मेहमानों की मौजूदगी में परेड की शुरुआत राष्ट्रपति द्वारा सलामी लेने के साथ हुई। इस दौरान भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं, अनुशासित सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला।परेड के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भारत न केवल अपनी विरासत पर गर्व करता है, बल्कि आधुनिक तकनीक, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और सुरक्षा क्षमताओं के साथ भविष्य की ओर भी मजबूती से बढ़ रहा है।
जानकारी दे दें कि, , इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह की प्रमुख थीम ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष रही। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह राष्ट्रगीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। परेड के दौरान विभिन्न प्रस्तुतियों और झांकियों में ‘वंदे मातरम्’ की भावना, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की गाथा को दर्शाया गया।
इस वर्ष की परेड में मणिपुर की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। झांकी में राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक नृत्य, लोककलाएं और सामाजिक एकता को दर्शाया गया। यह झांकी न केवल पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विविधता को सामने लाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि मणिपुर जैसे राज्य भारत की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा हैं।
गणतंत्र दिवस केवल एक परेड नहीं, बल्कि यह भारतीय संविधान, लोकतंत्र और नागरिक कर्तव्यों का उत्सव है। 77 वर्षों की इस यात्रा में भारत ने कई चुनौतियों का सामना किया और निरंतर प्रगति की। इस वर्ष की परेड ने यह स्पष्ट किया कि भारत अपनी विरासत से जुड़ा हुआ है, लेकिन आधुनिकता और आत्मनिर्भरता की राह पर भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
कुल मिला कर वंदे मातरम् की गूंज, मणिपुर की झांकी और ऑपरेशन सिंदूर की गर्जना के साथ 77वें गणतंत्र दिवस की परेड भारत की शक्ति, संस्कृति और संकल्प का प्रतीक बनकर सामने आई। कर्तव्य पथ पर दिखा यह भव्य आयोजन न केवल देशवासियों के लिए गर्व का क्षण था, बल्कि दुनिया के सामने भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता, सांस्कृतिक समृद्धि और लोकतांत्रिक मजबूती का संदेश भी था।
