नई दिल्ली। जुलाई 2026 में आषाढ़ की अमावस्या भौमवती अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 13 जुलाई सोमवार को शाम 6:50 बजे शुरू होगी और 14 जुलाई मंगलवार को दोपहर 3:13 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार अमावस्या 14 जुलाई को मानी जाएगी।
स्नान-दान और तर्पण का मुहूर्त
अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना शुभ माना गया है। प्रातः 4 बजे से 5:30 बजे तक स्नान किया जा सकता है। पूजा के लिए सुबह 7 बजे से 10 बजे तक का समय उचित रहेगा। पितरों को तर्पण देने के लिए अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:01 बजे से 12:49 बजे तक कार्य किया जा सकता है। दान दोपहर 3 बजे तक किया जा सकता है।
धार्मिक महत्व
भौमवती अमावस्या मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए मंगल ग्रह की शांति के लिए पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन लाल रंग की वस्तुएं जैसे अनाज, वस्त्र, बर्तन और फल का दान पुण्यदायी माना जाता है। पीपल की परिक्रमा करना और तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ होता है। इस तिथि पर पितृ दोष और मंगल दोष कम करने में मदद मिलती है। भगवान विष्णु और हनुमान जी की पूजा के साथ पितरों को प्रसन्न किया जा सकता है।
जुलाई 2026 में कब पड़ेगी आषाढ़ अमावस्या?
हिंदू पंचांग के अनुसार जुलाई 2026 में आने वाली आषाढ़ अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व है। इस बार अमावस्या तिथि को लेकर कई लोगों के मन में यह सवाल है कि व्रत, स्नान-दान और पितरों का तर्पण 13 जुलाई को किया जाए या 14 जुलाई को। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 13 जुलाई 2026, सोमवार की शाम 6:50 बजे से प्रारंभ होगी और 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर 3:13 बजे तक रहेगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकांश व्रत, पूजा और दान का निर्धारण उदयातिथि के आधार पर किया जाता है। इसलिए इस वर्ष आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। मंगलवार को पड़ने के कारण इसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाएगा, जिसका विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है।
स्नान-दान और पूजा का शुभ मुहूर्त
अमावस्या के दिन पवित्र नदियों या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और भगवान का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- ब्रह्म मुहूर्त स्नान: प्रातः 4:00 बजे से 5:30 बजे तक
- पूजा का शुभ समय: सुबह 7:00 बजे से 10:00 बजे तक
- पितरों के तर्पण का अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से 12:49 बजे तक
- दान का उपयुक्त समय: दोपहर 3:00 बजे तक
मान्यता है कि इन शुभ मुहूर्तों में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
आषाढ़ अमावस्या सनातन परंपरा में आत्मचिंतन, दान, सेवा और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है। यदि श्रद्धालु इस दिन स्नान, पूजा, तर्पण और दान जैसे धार्मिक कार्य श्रद्धा एवं विश्वास के साथ करते हैं, तो यह आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
इस वर्ष उदयातिथि के आधार पर 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या मनाई जाएगी। ऐसे में जो श्रद्धालु इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान करना चाहते हैं, वे पंचांग के अनुसार निर्धारित शुभ मुहूर्त में पूजा, तर्पण और दान कर सकते हैं तथा अपनी परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों का पालन कर सकते हैं।
