नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘संसद चलो’ मार्च और जंतर-मंतर पर पेपर लीक व परीक्षा धांधली के मुद्दे पर चल रहे छात्र आंदोलन ने राजनीति को गर्मा दिया है। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है। इस मुद्दे ने बिखरे हुए विपक्ष को एकजुट होने का मौका दे दिया है।
यहां यह जानकारी देते चले कि, सीजेपी के नेतृत्व में तीन हफ्तों से चल रहे आंदोलन पर सोमवार को प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज की घटना के बाद विपक्ष सड़क से संसद तक सरकार को घेरने में सक्रिय हो गया। मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष ने पेपर लीक, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सीजेपी प्रतिनिधियों से मुलाकात की।
वही, विपक्षी दलों ने संसद के अंदर और बाहर एक स्वर में सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा की डिंपल यादव समेत कई नेताओं ने छात्रों और सोनम वांगचुक के समर्थन में आवाज उठाई। सपा सांसदों ने जंतर-मंतर मार्च किया और ‘नीट है या चीट है’ के नारे लगाए।विपक्ष का आरोप है कि सरकार बड़े मुद्दों पर जवाबदेही से बच रही है। सीजेपी आंदोलन ने विपक्ष को बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों और शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं पर सरकार को घेरने का हथियार दे दिया है।
छात्र आंदोलन बना राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा
CJP के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन का मुख्य फोकस पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दे हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि बार-बार होने वाली परीक्षा अनियमितताओं से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
इन्हीं मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन किया जा रहा है। संगठन ने ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान भी किया, जिसके बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी।
फिलहाल जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है और संसद के भीतर भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद, संसद में होने वाली बहस और विपक्ष की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।CJP के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल एक संगठन का प्रदर्शन नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार, विपक्ष और आंदोलनकारी संगठन इस मुद्दे के समाधान के लिए किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
