नई दिल्ली। हरी मिर्च के अंदर मौजूद छोटे-छोटे बीज सही परिस्थितियां मिलने पर नए मिर्च के पौधे को जन्म दे सकते हैं। अच्छी तरह पौधा तैयार करने के लिए सिर्फ मिर्च से बीज निकाल लेना काफी नहीं है। बीज की सही परिपक्वता, मिट्टी, नमी और तापमान का भी ध्यान रखना पड़ता है। अच्छी फूटाव के लिए पके फल से स्वस्थ बीज लेना और सही मिट्टी व नमी का ध्यान रखना जरूरी है।
इस संबंध में बता दें कि, मिर्च के बीज फल के अंदर बनते हैं। बीज के लिए पूरी तरह पकी हुई मिर्च ज्यादा बेहतर रहती है। बीज उत्पादन के लिए मिर्च को पौधे पर पकने दिया जाता है और फल लाल होने के बाद बीज निकाले जाते हैं। इसके बाद बीजों को फल से अलग करके अच्छी तरह सुखाया जाता है। खेती के लिए स्वस्थ और अच्छे बीज का इस्तेमाल करना जरूरी है। केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान भी स्वस्थ और बिना दाग वाले फलों से बीज लेने की सलाह देता है।
वही यह भी बताते चले कि, बीज को मिट्टी में बोने के बाद उसे नमी और सही तापमान मिलता है तो उसके अंदर से छोटी जड़ निकलती है। इसके बाद ऊपर की तरफ तना निकलता है और धीरे-धीरे पहली पत्तियां दिखाई देने लगती हैं। यही छोटा पौधा आगे चलकर मिर्च का पौधा बनता है। मिर्च की खेती में आमतौर पर पहले नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं और करीब 35 से 45 दिन के स्वस्थ पौधों को खेत में लगाया जाता है।
जानकारी दे दें कि, घर पर मिर्च का पौधा तैयार करने के लिए पूरी तरह पकी हुई और स्वस्थ मिर्च चुनना बेहतर रहता है। बीज निकालकर उन्हें सुखाने के बाद हल्की मिट्टी वाले गमले या नर्सरी ट्रे में लगाया जा सकता है। मिट्टी में पानी जमा नहीं होना चाहिए क्योंकि मिर्च के पौधों के लिए अच्छी ड्रेनेज वाली मिट्टी जरूरी होती है। बीज निकलने के बाद पौधे को पर्याप्त रोशनी और देखभाल की जरूरत होती है। जब पौधा मजबूत हो जाए तो उसे बड़े गमले या खेत में लगाया जा सकता है।
अंत में बताते चले कि, बाजार से खरीदी गई हर हरी मिर्च के बीज से मिलने वाला पौधा बिल्कुल उसी मिर्च जैसा होगा, इसकी गारंटी नहीं है। खासकर हाइब्रिड वैरायटी में अपने बीज से अगली पीढ़ी में वही क्वालिटी बनी रहे, यह जरूरी नहीं होता। खेती के लिए प्रमाणित और अच्छी क्वालिटी वाले बीज का इस्तेमाल ज्यादा भरोसेमंद रहता है। केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान भी किसानों के लिए क्वालिटी वाला बीज उपलब्ध कराता है।
