नई दिल्ली । आजकल कई लोग अपने घर की बालकनी या छत पर छोटा किचन गार्डन बनाते हैं, जिसमें सब्जियों के साथ रोजमर्रा के मसाले भी उगाए जाते हैं। जीरा, धनिया और सौंफ ऐसे मसाले हैं, जो लगभग हर भारतीय रसोई में इस्तेमाल होते हैं। घर पर इन्हें उगाते समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि इनमें से कौन सा मसाला कम पानी में आसानी से उग सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो व्यस्त होने के कारण पौधों को रोजाना ज्यादा समय नहीं दे पाते।
इस कड़ी में हम बता दें कि, जीरा उन मसालों में शामिल है, जिसे कम पानी में भी आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी खेती राजस्थान और गुजरात जैसे सूखे और गर्म इलाकों में बड़े पैमाने पर होती है, जहां पानी की उपलब्धता कम रहती है। जीरे का पौधा कम पानी में जीने का आदी होता है। इसे ज्यादा नमी वाली मिट्टी पसंद नहीं आती, बल्कि हल्की सूखी और रेतीली मिट्टी में यह बेहतर बढ़ता है। गमले में लगाने पर हफ्ते में दो से तीन बार हल्का पानी देना पर्याप्त होता है।
वही यह भी बताते चले कि, धनिया की पत्तियां और बीज दोनों रसोई में इस्तेमाल होते हैं। जीरे के मुकाबले धनिये के पौधे को थोड़ा ज्यादा पानी चाहिए, खासकर बीज से पौधा उगने के शुरुआती दिनों में। तब मिट्टी को हल्का नम रखना जरूरी होता है, वरना बीज ठीक से अंकुरित नहीं होते। पौधा बड़ा होने के बाद इसे बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं रहती, लेकिन जीरे जितना कम पानी में इसे नहीं उगाया जा सकता। धनिये को हल्की धूप और नियमित हल्की सिंचाई पसंद आती है।
यहां यह जानना भी आवश्यक हैं कि, सौंफ का पौधा जीरे और धनिये के बीच की स्थिति में आता है। इसे न तो बहुत ज्यादा पानी चाहिए और न ही बहुत कम। शुरुआत में बीज बोते समय मिट्टी को हल्का नम रखना जरूरी होता है। एक बार पौधा जड़ पकड़ ले, तो यह कुछ हद तक सूखे को भी सहन कर सकता है। हालांकि गर्मियों में इसे थोड़ी नियमित सिंचाई की जरूरत पड़ती है, वरना पौधा कमजोर पड़ सकता है।
तीनों की तुलना करें तो जीरा सबसे ज्यादा सूखा सहने वाला और कम पानी में उगने वाला मसाला है। इसके बाद सौंफ आती है, जो मध्यम मात्रा में पानी लेकर अच्छी तरह बढ़ सकती है। धनिये को सबसे ज्यादा नियमित पानी और नमी की जरूरत होती है, खासकर छोटा होने पर। पानी की कमी वाले क्षेत्रों या रोजाना समय न दे पाने वाले लोगों के लिए जीरा सबसे आसान विकल्प है। कम पानी में मसाले उगाने के लिए गमले में रेत मिली मिट्टी का इस्तेमाल करें, ताकि पानी जमा न रहे। गमले के नीचे छेद होना चाहिए और पौधों को सुबह या शाम पानी दें।
