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नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 24 जुलाई 2026 को NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र धरने पर डटे हुए हैं, जबकि मुंबई, पटना और अन्य शहरों में भी छात्रों का महा-संग्राम जारी है। भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

यहां हम आपको यह जानकारी देते चले कि, CJP के आंदोलनकारी 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे थे, तब पुलिस से झड़प हुई थी जिसमें कई प्रदर्शनकारी और 118 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। सरकार ने सुधार, मुआवजे और संसद में चर्चा का लिखित आश्वासन दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया।विपक्षी नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत अन्य नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों का समर्थन किया। आंदोलन की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने भी हंगामा किया और प्रधान को हटाने की मांग उठाई।सरकार और CJP के बीच दोपहर 12:30 बजे संविधान क्लब में बैठक प्रस्तावित है। जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह इस वार्ता का नेतृत्व करेंगे। दिल्ली पुलिस ने सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।

20 जुलाई की झड़प के बाद बढ़ी सतर्कता

इस आंदोलन की पृष्ठभूमि 20 जुलाई की उस घटना से जुड़ी है, जब CJP के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे थे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस घटना में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए थे, वहीं 118 पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए। इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की और राजधानी में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई।

24 जुलाई के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने एहतियात के तौर पर अपने सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। प्रमुख सरकारी भवनों, संसद परिसर, जंतर-मंतर और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी अप्रिय स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

छात्रों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन कर रहे छात्रों और CJP की ओर से कई प्रमुख मांगें सामने रखी गई हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बताई जा रही है। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई, दोषियों को शीघ्र दंड, परीक्षा सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने तथा शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है।

छात्रों का कहना है कि केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना समय की आवश्यकता है। उनका मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर सुधार किए जाने चाहिए।

फिलहाल देशभर में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है और सभी की नजर सरकार तथा CJP के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हुई है। यदि बातचीत में सहमति बनती है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है, जबकि किसी ठोस निष्कर्ष के अभाव में प्रदर्शन आगे भी जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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