नई दिल्ली। कलौंजी का इस्तेमाल भारतीय रसोई में मसाले के रूप में लंबे समय से किया जाता है। अचार का स्वाद बढ़ाने और सेहत दुरुस्त रखने के लिए इसे इस्तेमाल किया जाता है। औषधीय गुणों से भरपूर इन काले बीजों को अब बाजार से खरीदने की बजाय घर पर ही आसानी से उगाया जा सकता है। गमले या छोटे बालकनी गार्डन में बिना ज्यादा मेहनत के शुद्ध ऑर्गेनिक कलौंजी तैयार की जा सकती है। इसके नीले और सफेद रंग के सुंदर फूल देखने में आकर्षक होते हैं और सूखने पर ढेर सारे बीज देते हैं।
इस संबंध में जानकारी दे दें कि, कलौंजी उगाने के लिए 10 से 12 इंच का गमला चुनें जिसमें नीचे पानी निकलने का अच्छा छेद हो। मिट्टी तैयार करने के लिए 60 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी में 40 प्रतिशत गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाएं। रसोई में इस्तेमाल होने वाली साबुत कलौंजी के बीजों को मिट्टी की ऊपरी सतह पर हल्का छिड़क दें और ऊपर से हल्की मिट्टी की परत से ढक दें। स्प्रे बोतल से थोड़ा पानी छिड़ककर नमी बनाए रखें। गमले को ऐसी जगह रखें जहां दिन में 4 से 5 घंटे धूप मिलती हो। 7 से 10 दिनों में छोटे अंकुर निकलने लगते हैं।
अंत में चलते चलते बता दें कि, जब पौधे थोड़े बड़े हो जाएं तो मिट्टी सूखने पर ही पानी दें, ज्यादा पानी से जड़ें सड़ सकती हैं। लगभग 2 से 3 महीने में पौधे पर सुंदर फूल आते हैं जो बाद में फल बन जाते हैं। जब फल पककर भूरे रंग के हो जाएं और सूखने लगें तब कलौंजी तैयार समझें। पके फलों को तोड़कर धूप में सुखाएं, हाथों से मसलकर काले बीज अलग करें। इन्हें छानकर एयरटाइट डिब्बे में रख लें। इस तरह कम देखभाल में घर बैठे केमिकल-फ्री कलौंजी हासिल की जा सकती है।
