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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया इस साल बड़ी गिरावट के साथ 96 लेवल के पार पहुंच गया है। बुधवार को इसने ऑल टाइम लो स्तर छूते हुए 97 के करीब पहुंच गया था। गुरुवार को रुपये में थोड़ी रिकवरी हुई और यह 41 पैसे चढ़कर 96.45 पर पहुंच गया।

इस संबंध में आईएमएफ की पूर्व डिप्टी एमडी गीता गोपीनाथ ने रुपये के 100 के स्तर तक पहुंचने की चेतावनी दी है। रुपये पर दबाव की मुख्य वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मजबूत डॉलर है। विदेशी निवेशकों ने इस साल 2.20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की है। पिछले एक साल में रुपया डॉलर के मुकाबले 10-12 प्रतिशत कमजोर हुआ है।

आर्थिक जानकारों के मुताबिक आने वाले समय में रुपये की चाल काफी हद तक वैश्विक बाजार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि डॉलर मजबूत बना रहता है, तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है।

हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र की वृद्धि और निर्यात गतिविधियां रुपये को कुछ समर्थन दे सकती हैं। रिजर्व बैंक भी जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकता है।

फिलहाल एशिया की कई अर्थव्यवस्थाएं डॉलर की मजबूती के प्रभाव का सामना कर रही हैं और भारतीय रुपया भी उसी वैश्विक दबाव का हिस्सा माना जा रहा है।

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