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कानपुर। कानपुर में तीन जूनियर क्लर्क (बाबू) को चपरासी (पियोन) पद पर डिमोट कर दिया गया क्योंकि वे 25 शब्द प्रति मिनट की अनिवार्य टाइपिंग गति हासिल नहीं कर पाए। नियमों के अनुसार यह टाइपिंग स्पीड जरूरी थी।ये तीनों कर्मचारी 2024 में पहली बार टाइपिंग टेस्ट में फेल हुए थे। उन्हें सुधार के लिए दूसरा मौका दिया गया, लेकिन 2025 में भी वे टेस्ट पास नहीं कर सके। इसके बाद डिमोशन का फैसला लिया गया।

सरकारी नौकरियों में क्लर्क, स्टेनोग्राफर और पर्सनल असिस्टेंट जैसे पदों पर टाइपिंग टेस्ट अनिवार्य होता है ताकि कंप्यूटर पर दस्तावेज तेजी से टाइप किए जा सकें। कई भर्ती प्रक्रियाओं में लिखित परीक्षा के बाद टाइपिंग या स्किल टेस्ट क्वालिफाइंग प्रकृति का होता है। उदाहरण के लिए, यूपीपीएससी आरओ/एआरओ में हिंदी टाइपिंग में 25 शब्द प्रति मिनट की गति क्वालिफाइंग मानी जाती है और असफल होने पर चयन नहीं होता।

अधिकारिक अधिसूचना में यदि टाइपिंग को आवश्यक बताया गया हो तो उम्मीदवारों को मानदंड पूरा करना जरूरी होता है। क्लर्क, डेटा एंट्री ऑपरेटर, स्टेनोग्राफर और आरओ/एआरओ जैसे पदों में टाइपिंग जरूरी है, जबकि तकनीकी, इंजीनियरिंग, पुलिस, शिक्षण या प्रशासनिक लेखा संबंधी नौकरियों में टाइपिंग टेस्ट नहीं होता।

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