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नई दिल्ली। घर के किचन गार्डन में करेला उगाना आसान है। अच्छी गुणवत्ता वाले बीज चुनें, जो हल्के भूरे रंग के, कठोर बाहरी छिलके वाले और सामान्य आकार के हों। बीजों को बोने से पहले 8 से 10 घंटे पानी में भिगोकर रखें।मिट्टी को हल्की और अच्छी जल निकासी वाली बनाएं। इसमें गोबर की खाद या ऑर्गेनिक कंपोस्ट मिलाएं। बीजों को 1 से 2 इंच की गहराई पर बोएं और ऊपर से हल्का पानी छिड़कें। इससे जड़ें जल्दी मजबूत होती हैं।

बीज 10 से 15 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं। छोटे पौधे बनने के बाद बेल शुरू हो जाती है। पौधा थोड़ा बड़ा होने पर तुरंत ट्रेलिस, रस्सी या लकड़ी का सहारा दें, ताकि बेल सीधी ऊपर की ओर बढ़े।करेला की बेल को रोजाना 5 से 6 घंटे धूप मिलनी चाहिए। नियमित रूप से पानी दें, लेकिन ज्यादा पानी न दें ताकि जड़ें खराब न हों। उचित देखभाल में 15 दिनों में ही हरी-भरी लहलहाती बेल दिखने लगती है।मिट्टी में गोबर की

बीज का सही चयन है पहली शर्त

करेला उगाने के लिए सबसे जरूरी है अच्छे गुणवत्ता वाले बीजों का चयन। बीज हल्के भूरे रंग के, मजबूत और कठोर बाहरी छिलके वाले होने चाहिए। कमजोर या खराब बीजों से अंकुरण सही नहीं होता, जिससे पौधे का विकास भी प्रभावित होता है।

बीजों को बोने से पहले 8 से 10 घंटे तक पानी में भिगोकर रखना बेहद जरूरी है। इससे बीज जल्दी अंकुरित होते हैं और पौधा स्वस्थ बनता है।

मिट्टी की तैयारी कैसे करें

करेला की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का सही होना बहुत जरूरी है। इसके लिए हल्की, भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी का इस्तेमाल करें।

मिट्टी तैयार करते समय उसमें गोबर की खाद या ऑर्गेनिक कंपोस्ट मिलाएं। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधे को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं। जैविक खाद के इस्तेमाल से पौधे का विकास तेजी से होता है और बेल जल्दी फैलती है।

15 दिनों में लहलहाती बेल का राज

अगर आप सही तरीके से बीज चयन, मिट्टी की तैयारी, सिंचाई और धूप का ध्यान रखते हैं, तो मात्र 15 दिनों में ही करेला की बेल हरी-भरी और लहलहाती नजर आने लगती है।

यह न केवल आपके किचन गार्डन की खूबसूरती बढ़ाती है, बल्कि आपको ताजी और सेहतमंद सब्जी भी प्रदान करती है।

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