नई दिल्ली। घर में रोजाना खाना बनाते समय आलू, प्याज, लहसुन, केला, लौकी, खीरा और दूसरी सब्जियों-फलों के छिलके बड़ी मात्रा में निकलते हैं। आमतौर पर इन्हें बेकार समझकर डस्टबिन में डाल दिया जाता है, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यही किचन वेस्ट होम गार्डन के लिए उपयोगी जैविक खाद का स्रोत बन सकता है। इससे घर के गमलों में लगे पौधों को पोषण देने के साथ-साथ रोजाना निकलने वाले जैविक कचरे को भी उपयोगी बनाया जा सकता है।
छिलकों से लिक्विड खाद बनाने का तरीका
पौधों को तुरंत एनर्जी देने के लिए लिक्विड बायो-फर्टिलाइजर तैयार किया जा सकता है। इसके लिए आलू, प्याज, लहसुन, केला और हरी सब्जियों के ताजे छिलके इकट्ठा करें। एक बाल्टी या प्लास्टिक के बड़े डिब्बे में इन छिलकों को डालकर ऊपर से पानी भर दें। इसे छायादार जगह पर ढककर तीन से चार दिनों तक रखें। हर दिन लकड़ी की मदद से अच्छी तरह हिलाते रहें ताकि फर्मेंटेशन सही तरीके से हो। चौथे दिन पानी का रंग गहरा हो जाता है और पोषक तत्व पानी में घुल जाते हैं। इस पानी को छलनी से छान लें। इस्तेमाल से पहले एक मग लिक्विड खाद में तीन मग सादा पानी मिलाएं। इस घोल को हफ्ते में एक बार पौधों की जड़ों में डालें, जिससे फूल और कलियां झड़ने की समस्या कम होती है।
सूखी ऑर्गेनिक खाद तैयार करने के स्टेप्स
सूखी और दानेदार खाद बनाने के लिए बड़ी प्लास्टिक की बाल्टी या मिट्टी का मटका लें, जिसके तले में तीन-चार छोटे छेद हों ताकि हवा का वेंटिलेशन बना रहे। सबसे नीचे सूखे पत्तों, कोकोपीट या कार्डबोर्ड के छोटे टुकड़ों की परत बिछाएं। इसके ऊपर सब्जियों और फलों के छिलकों की परत डालें। हर परत के ऊपर थोड़ा सूखा चूना या गार्डन की पुरानी मिट्टी छिड़कते रहें, जिससे बदबू न आए और कीड़े न लगें। मटका भरकर ऊपर से ढक्कन बंद कर दें। हफ्ते में एक बार मिश्रण को ऊपर-नीचे पलटें ताकि नमी और हवा का बैलेंस बना रहे। लगभग 45 से 60 दिनों में यह कचरा गलकर महकदार, गहरे भूरे रंग की दानेदार कंपोस्ट खाद में बदल जाता है।
पौधों के लिए होममेड खाद के फायदे
सब्जियों के छिलकों से बनी यह ऑर्गेनिक खाद मिट्टी की वॉटर होल्डिंग कैपेसिटी बढ़ा देती है, जिससे गर्मियों में गमलों की मिट्टी जल्दी नहीं सूखती। यह मिट्टी में अच्छे बैक्टीरिया और केंचुओं को सक्रिय रखती है, जिससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं। खाद बनाते समय पका हुआ खाना, तेल, घी, मसालेदार ग्रेवी, मांस और डेयरी प्रोडक्ट्स न डालें, क्योंकि ये बदबू पैदा करते हैं और चूहों व फंगस को आकर्षित करते हैं। नींबू या संतरे जैसे खट्टे छिलकों का इस्तेमाल कम मात्रा में ही करें, ताकि खाद का पीएच लेवल एसिडिक न हो। महीने में एक बार दो मुट्ठी यह कंपोस्ट हर गमले में डालने से पौधे बिना केमिकल के हरे-भरे बने रहते हैं।
छिलकों से तैयार करें लिक्विड खाद
अगर पौधों को आसानी से इस्तेमाल होने वाला जैविक पोषण देना चाहते हैं तो किचन वेस्ट से लिक्विड खाद तैयार की जा सकती है। इसके लिए आलू, प्याज, लहसुन, केला और हरी सब्जियों के ताजे छिलके इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
सबसे पहले इन छिलकों को इकट्ठा कर लें। इसके बाद इन्हें एक बाल्टी या बड़े प्लास्टिक के कंटेनर में डालें। अब इसमें इतना पानी डालें कि छिलके अच्छी तरह डूब जाएं। कंटेनर को ढककर तीन से चार दिनों तक छायादार स्थान पर रखा जा सकता है।
फर्मेंटेशन के दौरान मिश्रण को रोजाना लकड़ी या किसी साफ डंडे की मदद से हिलाना जरूरी है। इससे सामग्री और पानी आपस में अच्छी तरह मिलते हैं। कुछ दिनों बाद पानी का रंग गहरा हो सकता है और उसमें जैविक पदार्थों से घुले पोषक तत्व मौजूद हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, आलू-प्याज से लेकर फल और हरी सब्जियों के छिलके तक किचन का जैविक कचरा सही तरीके से इस्तेमाल करने पर होम गार्डन के लिए उपयोगी कंपोस्ट का स्रोत बन सकता है। सही नमी, हवा और सामग्री के संतुलन के साथ तैयार की गई कंपोस्ट मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और पौधों की स्वस्थ वृद्धि में मदद कर सकती है। इस तरह किचन वेस्ट को कचरा समझकर फेंकने के बजाय पौधों के लिए उपयोगी संसाधन बनाया जा सकता है।
