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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। उन्होंने इसे 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक बताया, जो नारी शक्ति को समर्पित है।

पीएम मोदी ने कहा कि देश की विकास यात्रा के अहम पड़ावों के बीच भारत यह निर्णय लेने जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह निर्णय सामाजिक न्याय को केवल नारा नहीं, बल्कि कार्य संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा बनाने वाला होगा।प्रधानमंत्री ने बताया कि राज्यों की विधानसभाओं से लेकर संसद तक दशकों की प्रतीक्षा का अंत 16, 17 और 18 अप्रैल को होने जा रहा है। 2023 में नई संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में पहला कदम उठाया गया था। अब इसे समय पर लागू करने के लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक बुलाई जा रही है।

पीएम मोदी ने कहा कि सभी दलों ने 2023 में अधिनियम को सर्वसम्मति से पास किया था और 2029 तक इसे लागू करने पर जोर दिया था। उन्होंने इस बार भी संवाद, सहयोग और सहभागिता से काम पूरा करने का विश्वास जताया। सम्मेलन में उन्होंने देश की कोटि-कोटि महिलाओं का आशीर्वाद लेने की बात कही और उन्हें नए युग के आगमन की बधाई दी।उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में 14 लाख से अधिक महिलाएं स्थानीय निकायों में काम कर रही हैं और लगभग 21 राज्यों में पंचायतों में उनकी भागीदारी करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 2023 में इस अधिनियम को सभी राजनीतिक दलों ने सर्वसम्मति से पारित किया था, जो भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और सहमति की राजनीति का उदाहरण है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार भी सभी दल संवाद, सहयोग और सहभागिता के जरिए इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे। उनका कहना था कि यह निर्णय किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश की महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक होगा।

कुल मिलाकर, ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन की प्रस्तावना साबित हुआ है। अब देश की नजरें 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि यह ऐतिहासिक पहल किस तरह से और कितनी जल्दी धरातल पर उतरती है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी एक नई ऊंचाई पर पहुंच सकती है, जो लोकतंत्र को और अधिक समावेशी और सशक्त बनाएगी।

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