पटना।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुक्रवार दोपहर राज्यसभा की शपथ लेकर सांसद बन जाएंगे। शपथ ग्रहण के बाद वे शाम करीब 6:20 बजे तक पटना लौटने वाले हैं।नीतीश कुमार साल 2005 से बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे हैं और अब तक 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। यह सबसे अधिक बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड उनके नाम है। यदि वे 14 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते हैं, तो उनका कुल कार्यकाल 19 वर्ष 236 दिन का होगा।
इस अवधि के साथ नीतीश कुमार देश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं की सूची में आठवें स्थान पर होंगे। सबसे अधिक बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड उनके नाम है, लेकिन सबसे लंबा कार्यकाल उनके पास नहीं है।देश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड पवन कुमार चामलिंग (सिक्किम) के नाम है, जिन्होंने 24 वर्ष 165 दिन तक इस पद पर कार्य किया। नीतीश कुमार यदि 2025 से 2030 तक का कार्यकाल पूरा करते तो एक और बड़ा रिकॉर्ड उनके नाम हो सकता था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह मुश्किल नजर आ रहा है।
10 बार मुख्यमंत्री बनने का अनोखा रिकॉर्ड
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर बेहद लंबा और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वर्ष 2005 से लेकर अब तक वे बिहार के सत्ता केंद्र में बने हुए हैं। इस दौरान वे कुल 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। भारत में किसी भी राज्य में इतनी बार मुख्यमंत्री बनने का गौरव बहुत कम नेताओं को प्राप्त हुआ है।
उनकी इस उपलब्धि को राजनीतिक स्थिरता, गठबंधन प्रबंधन और प्रशासनिक अनुभव का परिणाम माना जाता है। अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में भी उन्होंने सत्ता में वापसी की और अपनी पकड़ बनाए रखी।
लंबी पारी, लेकिन सबसे लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड नहीं
हालांकि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में कई बार शपथ ली है, लेकिन एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उनसे अभी भी दूर है। अगर वे 14 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते हैं, तो उनका कुल कार्यकाल 19 वर्ष 236 दिन का होगा। इस अवधि के साथ वे देश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं की सूची में आठवें स्थान पर पहुंच जाएंगे।
यह आंकड़ा उनके लंबे और प्रभावशाली शासन को दर्शाता है, लेकिन इसके बावजूद वे देश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता नहीं बन पाए हैं। इस सूची में शीर्ष स्थान पर सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग हैं, जिन्होंने 24 वर्ष 165 दिन तक लगातार इस पद पर कार्य किया।
राज्यसभा में नई भूमिका
राज्यसभा सदस्य के रूप में नीतीश कुमार की भूमिका अब और भी महत्वपूर्ण हो सकती है। अब तक वे मुख्य रूप से राज्य की राजनीति पर केंद्रित रहे, लेकिन संसद के उच्च सदन में पहुंचने के बाद वे राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी राय रख सकेंगे और नीति निर्माण में भागीदारी निभा सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि उनका अनुभव, खासकर शासन और विकास के क्षेत्र में, उन्हें संसद में एक प्रभावशाली आवाज बना सकता है। बिहार मॉडल, सुशासन और विकास योजनाओं को लेकर उनकी पहचान पहले से ही बनी हुई है, जिसे वे राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रस्तुत कर सकते हैं।
नीतीश कुमार का राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेना उनके लंबे राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ है। 10 बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड उनके नाम है, जो उनकी राजनीतिक कुशलता और लोकप्रियता को दर्शाता है। हालांकि, सबसे लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड वे हासिल नहीं कर पाए, लेकिन उनकी उपलब्धियां उन्हें भारतीय राजनीति में एक विशिष्ट स्थान दिलाती हैं।
