केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बार फिर आंतरिक असहमति की चर्चाएं तेज हो गई हैं। तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की नाराजगी खुलकर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शशि थरूर ने केरल विधानसभा चुनावों की रणनीति को लेकर कांग्रेस हाईकमान द्वारा बुलाई गई एक अहम बैठक से दूरी बना ली है। इस बैठक में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित पार्टी के कई शीर्ष नेताओं के शामिल होने की उम्मीद थी।
केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद शशि थरूर की कांग्रेस से नाराजगी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आज केरल विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों पर चर्चा करने के लिए कांग्रेस हाई कमान द्वारा बुलाई गई मीटिंग में शशि थरूर हिस्सा नहीं लेंगे। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी की हालिया कोच्चि यात्रा के दौरान ‘उचित सम्मान’ न मिलने पर शशि थरूर ने खुद को अपमानित महसूस किया। राहुल गांधी की महापंचायत के दौरान अपने साथ हुए व्यवहार से शशि थरूर नाराज हैं।
सूत्रों के अनुसार, शशि थरूर की नाराजगी की वजह राहुल गांधी की हालिया कोच्चि यात्रा के दौरान उन्हें ‘उचित सम्मान’ न मिलना बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी की महापंचायत के दौरान शशि थरूर के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उससे वे खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। यही कारण है कि उन्होंने दिल्ली में होने वाली कांग्रेस की चुनावी बैठक में शामिल न होने का फैसला लिया।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कोच्चि में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शशि थरूर को राहुल गांधी के पहुंचने से पहले अपना भाषण समाप्त करने को कहा गया। शशि थरूर, जो न सिर्फ एक अनुभवी सांसद हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, इस व्यवहार को अपने कद के अनुरूप सम्मान न मिलने के तौर पर देख रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि यही घटना उनकी नाराजगी की मुख्य वजह बनी।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम है शशि थरूर?
शशि थरूर कांग्रेस के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी पहचान सिर्फ राज्य या राष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में लंबा अनुभव, विदेश नीति पर गहरी समझ और अंग्रेजी व हिंदी दोनों भाषाओं पर मजबूत पकड़ उन्हें पार्टी का एक प्रभावशाली चेहरा बनाती है। केरल में भी उनकी लोकप्रियता और स्वीकार्यता व्यापक मानी जाती है।
ऐसे में, चुनाव से पहले उनका पार्टी की अहम बैठकों से दूरी बनाना कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस तरह की नाराजगी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर चुनावी रणनीति और पार्टी की एकजुटता पर पड़ सकता है।
