नई दिल्ली। बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। यह पर्व हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाया जाता है, जो बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। लेकिन अक्सर लोग इस त्योहार के नाम को लेकर उलझन में पड़ जाते हैं—क्या सही है ‘बसंत पंचमी’ या ‘वसंत पंचमी’? साथ ही, इस साल तिथि को लेकर भी भ्रम है कि यह 23 जनवरी को है या 24 जनवरी को। आइए इस कंफ्यूजन को पूरी तरह दूर करें और विस्तार से जानें सही जानकारी।
दूसरी ओर, हिंदी और लोक भाषाओं में, खासकर उत्तर भारत जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में इसे ‘बसंत पंचमी’ कहा जाता है। ‘बसंत’ हिंदी का सामान्य उच्चारण है, जो लोकप्रिय हो गया है। पंजाब में तो इसे ‘बसंत’ के रूप में ही जाना जाता है, जहां लोग पीले वस्त्र पहनकर उत्सव मनाते हैं और खेतों में सरसों के फूल खिलने का जश्न मनाते हैं। विकिपीडिया और अन्य स्रोतों में भी इसे दोनों रूपों में लिखा जाता है—Vasant Panchami या Basant Panchami। इंटरनेट पर सर्च करने पर ‘बसंत पंचमी’ अधिक लोकप्रिय है, क्योंकि हिंदी बोलने वाले क्षेत्रों में यह ज्यादा इस्तेमाल होता है। लेकिन शास्त्रों में ‘वसंत’ अधिक सटीक है। निष्कर्ष यह कि दोनों सही हैं—नाम की शुद्धता संदर्भ पर निर्भर करती है। आप जहां के हैं, उसी उच्चारण का प्रयोग कर सकते हैं, कोई गलत नहीं है।
पूजा का शुभ मुहूर्त विभिन्न स्थानों पर थोड़ा अलग-अलग हो सकता है, लेकिन सामान्यतः सुबह 7 बजे से दोपहर 12-1 बजे तक का समय सर्वोत्तम माना जाता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में मुहूर्त सुबह 7:13 से 12:33 तक या अन्य जगहों पर 7:23 से 12:22 तक बताया गया है। इस दौरान मां सरस्वती की पूजा, किताबों-वीणा की आराधना, पीले वस्त्र धारण करना, पीले भोग (केसरिया हलवा, बेसन लड्डू आदि) चढ़ाना और सरस्वती मंत्र जप करना शुभ है।
बसंत पंचमी का महत्व बहुत गहरा है। यह सिर्फ बसंत ऋतु की शुरुआत नहीं, बल्कि ज्ञान की देवी मां सरस्वती का जन्मोत्सव या प्राकट्य दिवस भी माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन मां सरस्वती ब्रह्मा जी के कमंडल से प्रकट हुईं और उन्होंने मानव को वाणी, ज्ञान और कला का वरदान दिया।
कुल मिलाकर, बसंत पंचमी या वसंत पंचमी दोनों नाम सही हैं—एक शास्त्रीय, दूसरा लोकप्रिय। 2026 में यह 23 जनवरी को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर मां सरस्वती की कृपा से सभी को ज्ञान, बुद्धि और सफलता प्राप्त हो। जय मां सरस्वती!
