भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की वित्तीय व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। दशकों से चले आ रहे जटिल और बिखरे हुए सर्कुलरों को हटाते हुए RBI ने 5673 पुराने सर्कुलर रद्द किए हैं, जिनमें से कुछ साल 1944 तक पूर्व के थे। साथ ही, करीब 9000 सर्कुलरों को मिलाकर 244 नई ‘मास्टर गाइडलाइन’ जारी की गई हैं। यह बदलाव भारत की बैंकिंग प्रणाली को और अधिक सुव्यवस्थित और समझने में आसान बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
RBI के इन बदलावों का आम आदमी पर क्या असर होगा? इसके जवाब में एससी मुर्मू कहती हैं कि गवर्मेंट सिक्योरिटीज से जुड़े लोन को लेकर सर्कुलर में बदलाव किया गया है। ऐसे में गवर्मेंट सिक्योरिटीज खरीदने वाले लोगों पर इसका असर हो सकता है।RBI के इस बड़े परिवर्तन का आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा? इसका जवाब डिप्टी गवर्नर एस. सी. मुर्मू ने स्पष्ट किया है।
बैंकों के लिए बड़ा बदलाव: कंप्लायंस आसान
सालों से बैंकों को हज़ारों पन्नों के दिशानिर्देशों के बीच सही नियम ढूंढने में कठिनाई होती थी।
नई व्यवस्था के बाद:
- सभी गाइडलाइन एक स्थान पर उपलब्ध होंगी
- समय की बचत होगी
- गलत नियमों के आधार पर निर्णय लेने का जोखिम खत्म होगा
- RBI निरीक्षण (Inspection) में आसानी होगी
- बैंकिंग सिस्टम में एकरूपता बढ़ेगी
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भारत का बैंकिंग सिस्टम अधिक आधुनिक और विश्व-स्तरीय बनेगा।
RBI ने संकेत दिए हैं कि नियमों की समीक्षा लगातार जारी रहेगी।
डिजिटल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा और वित्तीय प्रौद्योगिकी (FinTech) के तेजी से बढ़ते प्रभाव को देखते हुए आगे भी कई नए दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं। RBI द्वारा 5673 पुराने सर्कुलरों को रद्द करना और 244 नई मास्टर गाइडलाइन जारी करना भारतीय बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जा रहा है।
इस कदम से:
- बैंकिंग नियम सरल होंगे
- ग्राहकों की सुरक्षा और सुविधा बढ़ेगी
- सरकारी प्रतिभूतियों और डिजिटल बैंकिंग में स्पष्टता आएगी
- बैंकिंग संचालन में पारदर्शिता और तेजी आएगी
कुल मिलाकर, यह सुधार भारत की बैंकिंग प्रणाली को और आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार बनाता है।
