पश्चिम बंगाल में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में एक बार फिर नया तूफान खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और चुनाव आयोग के बीच तीखा टकराव देखने को मिल रहा है। TMC ने इस प्रक्रिया को “निर्दयी, अव्यवस्थित और खतरनाक” बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह केवल मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने का नियमित और आवश्यक अभियान है। लेकिन इसके बावजूद राजनीतिक पारा लगातार बढ़ता जा रहा है।
चुनाव आयोग (EC) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को लेकर टकराव तेज हो गया है. शुक्रवार को EC से मुलाकात के दौरान TMC ने आरोप लगाया कि SIR से जुड़ी अब तक 40 मौतें हुई हैं, जिनमें बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) भी शामिल हैं. पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. TMC नेता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बताया
SIR क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों बढ़ा?
चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची को अद्यतन करता है ताकि:
- मृत व्यक्तियों के नाम हटाए जा सकें,
- अपात्र या फर्जी प्रविष्टियों को रोका जा सके,
- नए योग्य मतदाताओं को सूची में जोड़ा जा सके।
इसी उद्देश्य से आयोग ने इस बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया शुरू की है। यह प्रक्रिया देश के कई राज्यों में लागू की गई है, लेकिन सबसे ज्यादा विवाद पश्चिम बंगाल में सामने आया है। यह वह राज्य है जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए SIR की राजनीतिक संवेदनशीलता बढ़ गई है।
TMC का बड़ा दावा: 40 मौतें, BLO भी शामिल
सबसे गंभीर आरोप TMC ने यह लगाया है कि:
- SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तक 40 लोगों की मौत हो चुकी है।
- इनमें कई बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) भी शामिल हैं।
TMC का कहना है कि जांच-पड़ताल, सत्यापन और लगातार दबाव वाले अभियानों में BLOs को अत्यधिक तनाव झेलना पड़ रहा है, जिसकी वजह से उनकी जान जा रही है।
बता दें कि, राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि TMC SIR का विरोध नहीं करती, बल्कि उसकी “निर्दयी” और “अप्रशिक्षित तरीके से की जा रही” कार्यवाही का विरोध करती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी ने EC से पूछे गए 5 सवालों में से किसी का भी जवाब नहीं मिला। पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर जारी विवाद आने वाले चुनावों की तीव्रता और संवेदनशीलता को दर्शाता है।लिए जरूरी “शुद्धिकरण अभियान” बता रहा है।
- SIR की निगरानी के लिए वरिष्ठ IAS अधिकारियों की नियुक्ति
- BLOs की सुरक्षा के निर्देश
- दोनों पक्षों के तीखे बयान
ये सभी यह बता रहे हैं कि बंगाल का चुनावी मैदान अभी से गरम हो चुका है।
आने वाले सप्ताहों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SIR प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है और इसके राजनीतिक प्रभाव क्या सामने आते हैं।
