नई दिल्ली देश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण और मेरिट को लेकर लंबे समय से चल रही बहस पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। 5 जनवरी 2026 को जारी इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के वे उम्मीदवार जो सामान्य (जनरल/ओपन) श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करते हैं, उन्हें जनरल कैटेगरी में भी चयनित किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सही ठहराते हुए राजस्थान हाई कोर्ट प्रशासन की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि “ओपन” या “जनरल” कैटेगरी का मतलब ही “खुला” होता है – यह किसी खास जाति, वर्ग या लिंग के लिए आरक्षित नहीं है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने लिखा, “शब्द ‘ओपन’ का अर्थ सिर्फ ‘ओपन’ है, मतलब ऐसे रिक्त पद जो किसी विशेष श्रेणी के लिए चिह्नित नहीं हैं।
बता दें कि, यह फैसला राजस्थान हाई कोर्ट की भर्ती (2756 पद) के लिए लागू है, लेकिन इसका प्रभाव पूरे देश में सरकारी नौकरियों (UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे, राज्य स्तर) पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आरक्षण व्यवस्था को मजबूत करेगा, क्योंकि आरक्षण सामाजिक न्याय के लिए है, न कि मेरिट को दंडित करने के लिए। यह 50% आरक्षण कैप (इंद्रा साहनी केस) के साथ संतुलन बनाए रखता है।
जानकारी दे दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवेदन पत्र में आरक्षित श्रेणी लिखना केवल आरक्षित सूची में दावा करने का अधिकार देता है, न कि जनरल सीटों से वंचित करने का। यह फैसला संविधान की भावना के अनुरूप है – समानता, योग्यता और सामाजिक न्याय का संतुलन।
