लखनऊ में 10 जनवरी 2026 को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) और जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनाव आयोग (EC) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए इसे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के वोट काटने की सुनियोजित साजिश करार दिया। अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर विपक्षी वोट बैंक को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि भाजपा के फर्जी वोटों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने तीन बड़े सवाल पूछे और ड्राफ्ट लिस्ट में 2.89 करोड़ वोटरों के नाम कटने का जिक्र करते हुए कहा कि यह उनकी पहले की आशंका (करीब 3 करोड़) को सही साबित कर रहा है।
अखिलेश ने चुनाव आयोग से पहला सवाल किया – जब एक ही ब्लू लेवल ऑफिसर (BLO) विधानसभा और पंचायत दोनों के लिए SIR ड्राफ्ट तैयार कर रहा है, तो पूरे प्रदेश में 12.69 करोड़ (या 12.55 करोड़) वोटर कैसे हैं? ग्रामीण क्षेत्र और पूरे राज्य में वोटरों की संख्या एक समान कैसे हो सकती है? उन्होंने कहा कि यह डेटा में गड़बड़ी का स्पष्ट संकेत है।
क्लेम्स एंड ऑब्जेक्शंस की प्रक्रिया 6 जनवरी से 6 फरवरी तक चल रही है, और फाइनल रोल 6 मार्च को आएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा है। अखिलेश ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया और कहा कि PDA समाज के वोट काटकर भाजपा सत्ता बचाने की कोशिश कर रही है। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि SIR शुद्ध मतदाता सूची के लिए है और फर्जी नाम हटाए जा रहे हैं।यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए विवाद का केंद्र बन गई है, जहां अब मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी निष्पक्षता पर बहस तेज हो गई है।
