नई दिल्ली।हिंदू धर्म में मकर संक्रांति एक प्रमुख सौर पर्व है, जो सूर्य देव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश को चिह्नित करता है। यह उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है, जब दिन लंबे होने लगते हैं और सर्दी का प्रभाव कम होता है। इस पर्व पर स्नान, दान, तिल-गुड़ का सेवन और खिचड़ी का भोग-दान विशेष महत्व रखता है। लेकिन वर्ष 2026 में यह पर्व एक दुर्लभ संयोग में पड़ रहा है—षटतिला एकादशी के साथ। इससे खिचड़ी बनाने, खाने और दान करने को लेकर देशभर में कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है। लोग पूछ रहे हैं—कब बनेगी खिचड़ी? कब खाया जाए दही-चूड़ा? क्या एकादशी व्रत के नियमों का पालन करें या संक्रांति की परंपराएं?
जानकारी दे दें कि, एकादशी की तिथि भी इसी दिन प्रभावी है। षटतिला एकादशी (माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी) 13 जनवरी दोपहर 3:17 बजे से शुरू होकर 14 जनवरी शाम 5:52 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर व्रत 14 जनवरी को रखा जाएगा। पारण (व्रत खोलना) 15 जनवरी सुबह 7:15 से 9:21 बजे तक। यह संयोग काफी दुर्लभ है—पिछली बार 2003 में ऐसा हुआ था।
बता दें कि, मकर संक्रांति सूर्य की राशि परिवर्तन पर आधारित त्योहार है, जबकि एकादशी चंद्र तिथि पर। आचार्य रजनीश पांडेय जैसे विद्वान बताते हैं कि मकर संक्रांति तारीख या चंद्रमा पर नहीं, बल्कि सूर्य के गोचर पर निर्भर है। यह उत्तरायण का प्रतीक है, जब सूर्य देव अपने पुत्र शनि की राशि में प्रवेश करते हैं और खरमास समाप्त होता है।
प्राथमिकता एकादशी व्रत को: 14 जनवरी को एकादशी व्रत रखें। चावल, खिचड़ी या दही-चूड़ा का सेवन/दान न करें। फलाहार या व्रत अनुकूल भोजन लें। तिल, गुड़, कंबल, साबूदाना या तिल से बनी खिचड़ी (बिना चावल) का दान करें। तिल का छह उपयोग (स्नान, उबटन, हवन, तर्पण, भोजन, दान) करें, जो दरिद्रता नाश करता है।खिचड़ी और दही-चूड़ा कब?: एकादशी तिथि शाम 5:52 बजे समाप्त होने के बाद (द्वादशी शुरू) खिचड़ी बनाकर दान/सेवन करें। कई विद्वान 15 जनवरी को सलाह देते हैं,
बता दें कि, जब व्रत पारण हो जाए। कुछ जगहों पर 17 जनवरी (शनिवार) तक स्थगित करने की बात भी है, क्योंकि गुरुवार को खिचड़ी वर्जित मानी जाती है।क्षेत्रीय विविधता: उत्तर प्रदेश में सरकारी छुट्टी 15 जनवरी को घोषित की गई है। असम में माघ बिहू 15 जनवरी को। दक्षिण में पोंगल तीन दिनों तक मनाया जाता है।यह संयोग आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है। स्नान-दान से पाप नाश, तिल-गुड़ से समृद्धि और एकादशी से मोक्ष प्राप्ति संभव है। श्रद्धालु अपनी आस्था और स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्णय लें।
