नई दिल्ली। भारतीय यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अब और आसान हो गई है। जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा की आवश्यकता खत्म कर दी है। यह फैसला सोमवार, 12 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद लिया गया। दोनों नेताओं की बैठक गांधीनगर में हुई, जहां 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए और भारत-जर्मनी संबंधों को मजबूत करने की कई घोषणाएं की गईं। इस ट्रांजिट वीजा छूट से लाखों भारतीय यात्रियों को राहत मिलेगी, खासकर वे जो यूरोप या अन्य देशों की यात्रा के दौरान फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख या बर्लिन जैसे जर्मन एयरपोर्ट से कनेक्टिंग फ्लाइट लेते हैं।
ट्रांजिट वीजा क्या होता है?
ट्रांजिट वीजा (एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा या शेंगेन टाइप A वीजा) वह वीजा है जो कुछ देशों के नागरिकों को तब लेना पड़ता है जब उनकी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान किसी तीसरे देश के एयरपोर्ट पर कनेक्टिंग फ्लाइट लेनी हो। भारतीय नागरिकों के लिए जर्मनी में यह आवश्यकता पहले से लागू थी, भले ही यात्री एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में ही रहते और जर्मनी में प्रवेश न करते। उदाहरण के लिए, यदि कोई भारतीय यात्री दिल्ली से अमेरिका या लैटिन अमेरिका जा रहा है और फ्रैंकफर्ट में फ्लाइट बदलनी पड़ रही है, तो पहले ट्रांजिट वीजा लेना अनिवार्य था।
जानकारी दे दें कि, बैठक से पहले दोनों नेताओं ने अहमदाबाद में साबरमती आश्रम का दौरा किया और इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल में भाग लिया, जो सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। संयुक्त बयान में इंडो-पैसिफिक में द्विपक्षीय संवाद तंत्र, डिजिटल डायलॉग 2026-27 वर्क प्लान, इंटरनेट गवर्नेंस, एआई और इंडस्ट्री 4.0 पर सहयोग का उल्लेख है। दोनों नेताओं ने यूक्रेन, गाजा और आतंकवाद जैसे वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए।
यह कदम भारत-जर्मनी के बढ़ते विश्वास और साझेदारी को रेखांकित करता है। जहां व्यापार 50 अरब डॉलर पार कर चुका है और 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, वहीं लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। भारतीय यात्रियों के लिए यह बड़ी राहत है, जो वैश्विक यात्रा को सरल और सस्ता बनाएगी। दोनों देशों के बीच यह नया अध्याय लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देगा और आर्थिक-सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
