मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव 15 जनवरी 2026 को होने जा रहे हैं, जो महाराष्ट्र की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित होने वाले हैं। भारत की सबसे अमीर महानगरपालिका होने के नाते बीएमसी का बजट और प्रभाव राज्य की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है, लेकिन पिछले तीन वर्षों से बिना निर्वाचित निकाय के चल रही यह संस्था अब मतदाताओं के सामने है। 227 वार्डों में 1.03 करोड़ से अधिक मतदाता 15 जनवरी को मतदान करेंगे, जबकि मतगणना 16 जनवरी को होगी।
इस चुनाव की खासियत यह है कि राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। 2017 में अविभाजित शिवसेना ने 84 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा 82 पर रही थी। अब शिवसेना दो धड़ों में बंटी है—उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना। महायुति (भाजपा-शिंदे शिवसेना-अजित पवार एनसीपी) सत्ता में है, लेकिन बीएमसी में सीट-बंटवारे में भाजपा को 137 और शिंदे शिवसेना को 90 सीटें मिली हैं। अजित पवार की एनसीपी अलग लड़ रही है। विपक्ष में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के चचेरे भाइयों का 20 वर्ष बाद एकजुट होना सबसे बड़ा मोड़ है। दोनों ने मराठी अस्मिता पर जोर देते हुए संयुक्त रैलियां की हैं, और इसे “मराठी मानूस की आखिरी लड़ाई” बताया है।
बीएमसी चुनाव महाराष्ट्र के इन 5 बड़े मुद्दों का भविष्य तय करेगा:
1.मराठी अस्मिता और मराठी मानूस का मुद्दा: यह चुनाव का सबसे जोरदार और भावनात्मक मुद्दा है। उद्धव और राज ठाकरे ने संयुक्त रैलियों में “मुंबई महाराष्ट्र से अलग होने” की आशंका जताई है। उन्होंने हिंदी थोपने, बाहरी लोगों के आगमन और भूमि-धन पर कब्जे के आरोप लगाए हैं।
2.महायुति की एकजुटता और आंतरिक कलह: सत्ता में होने के बावजूद महायुति में दरार दिख रही है। भाजपा और शिंदे शिवसेना के बीच सीट-बंटवारे में शुरुआत में विवाद हुआ, लेकिन अंत में समझौता हो गया। अजित पवार की एनसीपी अलग लड़ रही है, जो मुस्लिम और दलित वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।
3.शहरी विकास और बुनियादी ढांचा: मुंबई में सड़कें, बाढ़, गड्ढे, सार्वजनिक परिवहन और स्लम पुनर्विकास बड़े मुद्दे हैं। महायुति मेनिफेस्टो में BEST बसों को 5,000 से 10,000 करने, इलेक्ट्रिक वाहन, महिलाओं के लिए 50% छूट, 3.5 मिलियन किफायती घर और स्लम पुनर्विकास का वादा किया है। धारावी पुनर्विकास पर फोकस है।
4. पर्यावरण, प्रदूषण और स्थिरता: मुंबई की हवा खराब है, और चुनाव प्रचार में पटाखे जलाने से प्रदूषण बढ़ा है। पार्टियां “ग्रीन मुंबई” का वादा कर रही हैं, लेकिन अभियान में पर्यावरण विरोधी गतिविधियां दिखी हैं। जल संकट, कचरा प्रबंधन और हरित क्षेत्र संरक्षण भी मुद्दे हैं। आरे कॉलोनी जैसे इलाकों में पर्यावरण बनाम विकास की बहस है।
5.स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण: स्वास्थ्य कार्ड, मुफ्त दवाएं, शिक्षा सुधार और महिलाओं की सुरक्षा पर फोकस है। महायुति ने लाड़की बहिण योजना जैसे कदमों का जिक्र किया है, लेकिन एसईसी ने चुनाव आचार संहिता के कारण कुछ भुगतान रोके हैं। शिक्षा में टीचर्स की मांगें और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर भी चर्चा में हैं।
बता दें कि, यह चुनाव मुंबई की भविष्य की दिशा तय करेगा। यदि थackeray भाइयों की मराठी अस्मिता वाली रणनीति काम करती है, तो विपक्ष मजबूत होगा। महायुति की जीत राज्य सरकार की ताकत बढ़ाएगी। मतदाता विकास, अस्मिता और सुशासन के बीच संतुलन तलाशेंगे।
