प्रयागराज। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले 2026 में एक युवा संत की चर्चा हर तरफ छाई हुई है। सतुआ बाबा, जिन्हें डिफेंडर और पोर्श जैसी करोड़ों की लग्जरी कारों में देखकर लोग हैरान हैं। मेला परिसर में उनकी महंगी गाड़ियों का काफिला, ब्रांडेड चश्मे और ठाठ-बाट देखकर श्रद्धालु और सोशल मीडिया यूजर्स दोनों दंग रह गए हैं।
आपको बता दें कि, माघ मेले में सतुआ बाबा का आश्रम सबसे बड़ा आवंटित किया गया है, जहां भव्य व्यवस्था और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। वे पीले वस्त्र धारण करते हैं, जनेऊ पहनते हैं और अक्सर रे-बैन जैसे ब्रांडेड सनग्लासेस लगाए नजर आते हैं। उनकी लग्जरी कारों के अलावा प्राइवेट जेट, क्रूज और लग्जरी एसयूवी का काफिला भी चर्चा में रहा है। हाल ही में उन्होंने पोर्श 911 टर्बो या टायकन जैसी स्पोर्ट्स कार खरीदी, जिसका पूजन मेला परिसर में ही किया गया। इन गाड़ियों पर ‘विष्णु स्वामी जगतगुरु सतुआ बाबा काशी’ लिखा होता है और कई उत्तराखंड (हरिद्वार) में रजिस्टर्ड हैं।
एक इंटरव्यू में बाबा ने और साफ किया, “क्या अध्यात्म में विश्वास रखने वाले इन गाड़ियों में नहीं चल सकते? ये सनातन की रफ्तार है। जो लोग सनातन को दबाने या बांटने की कोशिश करते हैं, उन्हें इन गाड़ियों की स्पीड से कुचल दिया जाएगा।” उन्होंने जातिवाद और समाज विभाजन पर भी निशाना साधा। बाबा का कहना है कि ये गाड़ियां भक्तों के चंदे से खरीदी गई हैं, आश्रम के नाम पर रजिस्टर्ड हैं और सभी कागजात उपलब्ध हैं।
जानकारी देते चले कि, विवाद की शुरुआत तब हुई जब डिफेंडर कार वाली तस्वीरें वायरल हुईं। लोग पूछने लगे कि साधु-संतों को इतनी महंगी गाड़ियां क्यों? साधारण संतों की सादगी वाली छवि से यह बिल्कुल अलग लगता है। विरोध बढ़ने पर सतुआ बाबा ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वे कभी ठेले पर, कभी ऊंट पर, कभी ट्रैक्टर पर और फिर डिफेंडर में दिखे। उन्होंने अपनी दिल्ली यात्रा का प्राइवेट जेट वाला वीडियो भी शेयर किया।
मीडिया से बातचीत में बाबा ने कहा, “महंगी गाड़ियां भोगियों की नहीं, योगियों की हैं। ये संसाधन भोग-विलास के लिए नहीं, योग और धर्म प्रचार के लिए हैं।” उन्होंने सनातन धर्म के वैभव का जिक्र करते हुए कहा कि अध्यात्म कभी गरीब नहीं रहा, यह कृपा और वैभव से बढ़ता है।
