ईरान में पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शनों ने देश की स्थिति को बेहद नाजुक बना दिया है। 19 जनवरी 2026 (सोमवार) को ईरान के राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख अहमद-रेजा रादन ने प्रदर्शनकारियों को अंतिम चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि दंगों में शामिल सभी लोगों को 72 घंटे के भीतर सरेंडर कर देना चाहिए, अन्यथा “कानून की पूरी ताकत” के साथ उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। समाचार एजेंसी एएफपी ने यह जानकारी प्रकाशित की।
एक ईरानी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया कि 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें लगभग 500 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। अधिकारी ने दावा किया कि “आतंकवादी तत्वों और सशस्त्र दंगाइयों” ने निर्दोष नागरिकों और सुरक्षा बलों की जान ली है। ईरानी सरकार ने प्रदर्शनों की शुरुआत को शांतिपूर्ण बताया, लेकिन बाद में इन्हें हिंसक और विदेशी साजिश से प्रेरित करार दिया। सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और अन्य अधिकारियों ने अमेरिका, इजराइल और अन्य “विदेशी दुश्मनों” पर आरोप लगाया कि वे ईरान की स्थिरता बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
इस बीच, पाकिस्तान में आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने एक अलग संदेश दिया। रविवार को लाहौर में पूर्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पोते जुनैद सफदर (मरियम नवाज के बेटे) के वलीमा समारोह में शामिल होने के दौरान उन्होंने “द न्यूज इंटरनेशनल” को इंटरव्यू दिया। मुनीर ने कहा कि इस्लाम के नाम पर बने पाकिस्तान का असली मकसद अब पूरा होने वाला है। अल्लाह ने पाकिस्तान को एक ऐतिहासिक मौका दिया है और देश तेजी से अपने निर्माण के उद्देश्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने जोर दिया कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर अस्तित्व में आया था और आज इस्लामिक देशों में इसका विशेष दर्जा है, जो आगे और बढ़ेगा।
जानकारी दे दें कि, ईरान और पाकिस्तान दोनों मुस्लिम बहुल देश हैं, लेकिन ईरान में शिया शासन है जबकि पाकिस्तान सुन्नी। दोनों में आंतरिक चुनौतियां अलग-अलग हैं, लेकिन ईरान का संकट अधिक हिंसक और गंभीर दिख रहा है। विश्व समुदाय इन घटनाक्रमों पर नजर रखे हुए है, क्योंकि ये क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।
