नई दिल्ली। 21 जनवरी 2026: वैश्विक व्यापार की दुनिया में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल है, लेकिन भारत इस चुनौती को अवसर में बदलने में सफल हो रहा है। जहां ट्रंप टैरिफ बम फोड़ने में व्यस्त हैं, वहीं भारत यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने की कगार पर पहुंच चुका है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दावोस सम्मेलन में इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ यानी अब तक की सबसे बड़ी व्यापार डील करार दिया है।
यह समझौता भारत और ईयू के बीच 2007 से चल रही बातचीत का परिणाम है, जो 2013 में रुकी थी, लेकिन 2022 में फिर शुरू हुई। अब बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 24 अध्यायों में से 20 पर सहमति बन चुकी है। यह डील 27 जनवरी 2026 को भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में घोषित होने की संभावना है, जब वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भारत आएंगे। वे गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
बता दें कि, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर उच्च टैरिफ लगाए हैं, जिसमें कुछ क्षेत्रों में 50 प्रतिशत तक की दरें शामिल हैं। यह टैरिफ रूसी तेल खरीद और अन्य मुद्दों पर प्रतिक्रिया के रूप में लगाए गए। इससे भारतीय निर्यातकों, खासकर टेक्सटाइल और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर असर पड़ा है। लेकिन भारत ने अपनी रणनीति बदली है। निर्यात बाजारों में विविधता लाई है, नए समझौते किए हैं और घरेलू सुधारों पर जोर दिया है। परिणामस्वरूप, भारतीय निर्यात में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
वही, इस समझौते से दोनों पक्षों को कई लाभ होंगे। टैरिफ में कमी से भारतीय वस्तुओं जैसे कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाएं, इंजीनियरिंग गुड्स और कृषि उत्पाद ईयू बाजार में सस्ते पहुंचेंगे। वहीं, ईयू से मशीनरी, ऑटोमोबाइल, केमिकल्स और हाई-टेक उत्पाद भारत में आसानी से आएंगे। निवेश संरक्षण समझौता (IPA), भौगोलिक संकेतक (GI) और अन्य मुद्दों पर भी सहमति बन रही है। इससे भारतीय कंपनियां ईयू में निवेश बढ़ा सकेंगी और यूरोपीय फर्म भारत में उत्पादन बढ़ा सकेंगी।
हालांकि, अभी कुछ काम बाकी है, जैसे कानूनी जांच और अंतिम मंजूरी। लेकिन दावोस में वॉन डेर लेयेन के बयान और आगामी शिखर सम्मेलन से साफ है कि यह डील जल्द ही हकीकत बनेगी। यह भारत की कूटनीतिक जीत है, जो दिखाती है कि चुनौतियों के बीच भी अवसर तलाशे जा सकते हैं।
