मुबई। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के दौर में जब हर हफ्ते नई-नई वेब सीरीज दर्शकों के सामने आती हैं, तब किसी सीरीज का अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता। लेकिन इमरान हाशमी की नई सीरीज ‘Taskaree’ ने न सिर्फ भारतीय दर्शकों का ध्यान खींचा है, बल्कि यह शो ग्लोबल लेवल पर भी ट्रेंड करता नजर आ रहा है। इस सीरीज को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या ‘Taskaree’ वाकई रियल लाइफ कस्टम ऑफिसर्स और तस्करी की असली घटनाओं पर आधारित है?
रावल कहते हैं कि कस्टम ऑफिसर की कहानी लिखते समय उन्हें अंदर की जानकारी मिली थी और उन्होंने स्क्रिप्ट में कई असली घटनाओं को शामिल किया। उन्होंने बताया, ‘हमारे कंसल्टेंट, जो खुद एक कस्टम ऑफिसर हैं, ने हमें रिटायर्ड और एक्टिव दोनों तरह के स्मगलरों से मिलवाया। उनकी काम करने के तरीकों में से बहुत कुछ स्क्रिप्ट में शामिल किया गया है, जो हमें स्मगलरों और कस्टम ऑफिसर्स ने बताया था’।
कंटेंट ही सबसे मजबूत आधार
किसी भी सीरीज या फिल्म की सफलता में सबसे अहम भूमिका कंटेंट की होती है। ‘Taskaree’ के लेखक विपुल के रावल, जो भारतीय नौसेना के पूर्व नाविक भी रह चुके हैं, मानते हैं कि कहानी का असलीपन ही दर्शकों को जोड़े रखता है। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनकी सभी कहानियां पूरी तरह वास्तविक घटनाओं पर आधारित नहीं होतीं, लेकिन इमरान हाशमी की यह सीरीज कई असल घटनाओं से प्रेरित जरूर है।
इस कड़ी मे हमआपको बता दें कि, आज भारतीय ओटीटी कंटेंट सिर्फ देश तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय दर्शक भी भारतीय क्राइम और थ्रिलर सीरीज में रुचि दिखा रहे हैं। ‘Taskaree’ की कहानी, प्रजेंटेशन और रियलिज्म ने विदेशी दर्शकों को भी आकर्षित किया है। तस्करी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे वैश्विक हैं, जिनसे हर देश किसी न किसी रूप में जूझता है। ऐसे में यह सीरीज भाषा और सीमाओं से परे जाकर लोगों से जुड़ पा रही है।
‘Taskaree’ सिर्फ एक क्राइम ड्रामा नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि किस तरह कस्टम ऑफिसर्स और कानून प्रवर्तन एजेंसियां देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती हैं। तस्करी न केवल अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है।
