भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस बीच अमेरिका के वरिष्ठ ट्रेड अधिकारी जैमीसन ग्रीर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि भारत-EU फ्री ट्रेड डील का सबसे ज्यादा फायदा भारत को मिलने वाला है। ग्रीर के मुताबिक, यह समझौता कई मायनों में भारत के पक्ष में झुका हुआ नजर आता है और इससे भारत को यूरोप के विशाल बाजार तक अभूतपूर्व पहुंच मिलेगी।
अमेरिकी ट्रेड अधिकारी का बयान
अमेरिकी ट्रेड अधिकारी जैमीसन ग्रीर ने फॉक्स बिजनेस को दिए एक इंटरव्यू में भारत-EU FTA पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अब तक जो भी डिटेल्स उन्होंने देखी हैं, उनसे साफ संकेत मिलता है कि भारत इस समझौते का बड़ा लाभार्थी है। ग्रीर ने कहा कि इस डील के लागू होने के बाद भारतीय कंपनियों और उत्पादों को यूरोपीय बाजार में पहले से कहीं ज्यादा पहुंच मिलेगी।
ग्रीर के शब्दों में, “मैंने अब तक इस डील के कुछ विवरण देखे हैं। ईमानदारी से कहूं तो इसमें भारत को ज्यादा फायदा मिलता दिख रहा है। भारत को यूरोप के बाजार में अधिक पहुंच मिल रही है और कुल मिलाकर भारत इस समझौते में टॉप पर नजर आ रहा है।”
इस दौरान हम आपको बता दें कि, यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच FTA तुरंत लागू नहीं होगा। यह समझौता 2027 तक चरणबद्ध तरीके से लागू हो सकता है। इसकी वजह EU की अनिवार्य और लंबी मंजूरी प्रक्रिया है।EU में किसी भी बड़े व्यापार समझौते को लागू करने से पहले यूरोपीय संसद और सदस्य देशों की औपचारिक मंजूरी जरूरी होती है। सिर्फ यूरोपीय आयोग का राजनीतिक समझौता काफी नहीं होता।FTA को लागू करने के लिए यूरोपीय संसद में इस पर बहस और वोटिंग होगी। संसद को यह अधिकार है कि वह समझौते को मंजूरी दे, रोक दे या इसमें बदलाव की मांग करे।
वही, ग्रीर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-EU फ्री ट्रेड डील के पीछे अमेरिका की बदलती व्यापार नीति एक बड़ा कारण है। उन्होंने बताया कि अमेरिका अब घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता दे रहा है और विदेशी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर अपने बाजार को ज्यादा सुरक्षित बना रहा है।
टेलीग्राफ का दावा: असली विजेता पीएम मोदी
इस समझौते को लेकर ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार द टेलीग्राफ ने भी भारत की तारीफ की है। अखबार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भले ही यूरोपीय आयोग इस FTA को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत बता रहा हो, लेकिन हकीकत में इसके सबसे बड़े विजेता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।
टेलीग्राफ के अनुसार, यूरोपीय यूनियन ने इस समझौते के लिए भारत और रूस के बीच करीबी संबंधों को भी नजरअंदाज कर दिया। यह उस समय खास तौर पर महत्वपूर्ण है, जब यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है। इसके बावजूद EU ने भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने को प्राथमिकता दी।
हालांकि, भारत-EU FTA तुरंत लागू नहीं होगा। यूरोपीय यूनियन की जटिल और लंबी मंजूरी प्रक्रिया के चलते इसे लागू होने में समय लगेगा। इस समझौते पर पहले यूरोपीय संसद में बहस होगी और फिर वोटिंग के जरिए इसे मंजूरी दी जाएगी। यूरोपीय संसद के पास यह अधिकार है कि वह समझौते को मंजूरी दे, रोक दे या इसमें बदलाव की मांग करे। इसलिए राजनीतिक सहमति के बावजूद इसे जमीन पर उतरने में 2027 तक का समय लग सकता है।कुल मिलाकर, भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी भारत के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं से साफ है कि इस डील ने वैश्विक व्यापार संतुलन में भारत की भूमिका को और मजबूत किया है।
