मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में यदि किसी एक नाम ने पिछले चार से साढ़े चार दशकों तक सत्ता, रणनीति और निरंतर प्रभाव बनाए रखा, तो वह नाम था अजित पवार। बुधवार सुबह महाराष्ट्र के बारामती में हुए एक दुखद प्लेन क्रैश में राज्य के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार का निधन हो गया। उनके आकस्मिक निधन की खबर से न केवल महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई। गुरुवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
महाराष्ट्र की राजनीति के बेताज बादशाह कहे जाने वाले अजित पवार का बुधवार को निधन हो गया और गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार होगा. अजित पवार ने अपने राजनीत…महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी के प्रमुख रहे अजित पवार का बुधवार सुबह प्लेन क्रैश में निधन हो गया।
शुरुआती राजनीतिक सफर
अजित पवार का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जहां राजनीति सांसों में बसती थी। हालांकि यह भी एक दिलचस्प तथ्य है कि महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार की पीढ़ी में शुरुआत में परिवार से कोई सक्रिय राजनीति में नहीं आया था। शरद पवार के भाई अनंतराव पवार के बेटे के रूप में अजित पवार ने धीरे-धीरे राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
अजित पवार की सबसे बड़ी खासियत उनकी राजनीतिक रणनीति मानी जाती थी। वे सत्ता के समीकरणों को भांपने में माहिर थे। यही कारण रहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में जब-जब अस्थिरता आई, अजित पवार किसी न किसी अहम भूमिका में नजर आए।कांग्रेस से एनसीपी के गठन के बाद अजित पवार शरद पवार के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार बने। समय के साथ वे पार्टी के भीतर शक्ति केंद्र के रूप में उभरे। कई बार उनके फैसले विवादों में भी आए, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ कभी कमजोर नहीं पड़ी।
‘डिप्टी सीएम’ की राजनीति
महाराष्ट्र में शायद ही कोई और नेता हो, जिसने इतनी बार उपमुख्यमंत्री पद संभाला हो। चाहे कांग्रेस-एनसीपी की सरकार रही हो या शिवसेना के साथ गठबंधन, अजित पवार हमेशा सत्ता के केंद्र में रहे। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी सरकार में भी वे उपमुख्यमंत्री बने और सरकार की स्थिरता में अहम भूमिका निभाई।
इसके बाद जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बगावत कर बीजेपी के साथ सरकार बनाई, तब भी राजनीतिक समीकरण बदले और अजित पवार एक बार फिर सत्ता के करीब नजर आए। यही वजह थी कि राजनीतिक गलियारों में कहा जाता था—“महाराष्ट्र में सरकार कोई भी बनाए, डिप्टी अजित पवार ही रहते हैं।”
बता दें कि, शरद पवार और अजित पवार का रिश्ता केवल चाचा-भतीजे का नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य जैसा भी रहा। शुरुआती दौर में दोनों के रिश्ते बेहद मजबूत थे। सुप्रिया सुले के सक्रिय राजनीति में आने से पहले अजित पवार को शरद पवार का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था।
