नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड समझौते (Interim Trade Framework) की घोषणा के साथ ही एक ऐसा नक्शा सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मचा दी है। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के ऑफिस ने इस ट्रेड डील के प्रचार के लिए जारी किए गए पोस्ट में भारत का एक नक्शा साझा किया है, जिसमें पूरे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन भी शामिल हैं, को भारत का अभिन्न हिस्सा दिखाया गया है। इस नक्शे में कोई लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) या विवादित क्षेत्र की कोई अलग सीमा नहीं खींची गई है, जो अमेरिका की पारंपरिक नीति से अलग है। यह घटना 7 फरवरी 2026 को सामने आई है, जब भारत-अमेरिका ट्रेड फ्रेमवर्क की डिटेल्स जारी की गईं।
नक्शे ने खींचा सबका ध्यान
यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव की ओर से साझा किए गए पोस्ट में अमेरिका-भारत अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट के तहत अमेरिकी उत्पादों के लिए भारत में नए बाजार खुलने की बात कही गई थी। इसमें ट्री नट्स, सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन, रेड सोरघम, ताजे और प्रोसेस्ड फलों जैसे उत्पादों का जिक्र किया गया।
हालांकि, इस पोस्ट के साथ जारी नक्शा चर्चा का केंद्र बन गया। इस नक्शे में पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा दिखाया गया है। खास बात यह रही कि नक्शे में न तो लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) दिखाई गई है और न ही किसी तरह का विवादित क्षेत्र या अलग सीमांकन दर्शाया गया है। साफ तौर पर पूरा क्षेत्र भारत का हिस्सा दिखाया गया है, जिसमें पीओके भी शामिल है।
पाकिस्तान के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका की ओर से जारी आधिकारिक नक्शों में पहले PoK को अलग से दिखाया जाता था या विवादित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया जाता था, जो पाकिस्तान की चिंताओं को ध्यान में रखता था। लेकिन इस बार USTR ने भारत के आधिकारिक राजनीतिक नक्शे का उपयोग किया है, जिसमें PoK और अक्साई चिन (जिस पर चीन का दावा है) दोनों को भारत का हिस्सा दिखाया गया है। कोई डैश्ड लाइन या डिस्क्लेमर नहीं है, जो इसकी गंभीरता को दर्शाता है।
इस कड़ी में बता दें कि, ट्रेड डील के संदर्भ में यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला है। अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने की बात कही है, जबकि भारत अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार खोलेगा। इसमें कृषि उत्पादों जैसे फल, नट्स, अनाज आदि पर फोकस है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘मेजर डील’ बताया है, जिसमें भारत रूसी तेल की खरीद कम करने और अमेरिकी सामान खरीदने का वादा कर रहा है। हालांकि, डील के फाइनल डिटेल्स और टाइमलाइन पर अभी स्पष्टता नहीं है, लेकिन यह फ्रेमवर्क दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगा।
