मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वॉशिंगटन भारत जैसे देशों पर दबाव बना रहा है ताकि वे रूस से सस्ता तेल न खरीदें। लावरोव का कहना है कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर नियंत्रण चाहता है, ताकि दुनिया के देशों को महंगी अमेरिकी गैस और ऊर्जा संसाधन खरीदने के लिए मजबूर किया जा सके। उन्होंने ये बयान 9 फरवरी को ‘डिप्लोमैटिक वर्कर्स डे’ के मौके पर दिया।
अमेरिका पर ऊर्जा नियंत्रण की कोशिश का आरोप
रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका का मकसद वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को अपने नियंत्रण में रखना है। उनका आरोप है कि अमेरिका चाहता है कि दुनिया के देश रूस जैसे देशों से सस्ता तेल न खरीदें और इसके बजाय अमेरिकी ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर हो जाएं।लावरोव ने कहा कि भारत सहित कई विकासशील देशों के लिए सस्ती ऊर्जा बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे उनकी आर्थिक वृद्धि और उद्योगों को सहारा मिलता है। ऐसे में यदि किसी देश पर दबाव डालकर ऊर्जा आपूर्ति के विकल्प सीमित किए जाते हैं, तो इसका सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
BRICS देशों पर भी दबाव का आरोप
लावरोव ने कहा कि अमेरिका भारत और अन्य BRICS देशों पर भी दबाव बना रहा है कि वे रूस से दूरी बनाएं। उन्होंने दावा किया कि रूस की प्रमुख तेल कंपनियों—लुकोइल और रोसनेफ्ट—पर रोक लगाई गई है और रूस के साथ व्यापार और निवेश को सीमित करने की कोशिश हो रही है।उनके मुताबिक, ये कदम वैश्विक व्यापार के सिद्धांतों के खिलाफ हैं और इससे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग प्रभावित हो रहा है।
कुल मिलाकर, लावरोव के बयानों से साफ है कि रूस अमेरिकी नीतियों को वैश्विक आर्थिक प्रभुत्व बनाए रखने की कोशिश मानता है। रूस BRICS और ग्लोबल साउथ के साथ मजबूत संबंधों पर जोर दे रहा है ताकि मल्टीपोलर दुनिया में अपनी स्थिति मजबूत कर सके। आने वाले दिनों में ऊर्जा, AI और BRICS एजेंडा पर चर्चाएं तेज होंगी, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करेंगी।
बता दें कि, लावरोव के बयान ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत की रणनीतिक भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ऊर्जा और कूटनीति के इस समीकरण में दुनिया के बड़े देश किस तरह संतुलन बनाते हैं।
