मूंगफली, जिसे ग्राउंडनट या पीनट भी कहा जाता है, भारत की एक प्रमुख तिलहनी फसल है। यह तेल, चटनी, नमकीन, मक्खन, पशु चारे और विभिन्न खाद्य पदार्थों के लिए इस्तेमाल होती है। भारत में मूंगफली की खेती मुख्य रूप से गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में की जाती है। यह फसल उष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छी तरह पनपती है और अच्छी उपज देती है। मूंगफली की खेती खरीफ, रबी और जायद तीनों मौसमों में की जा सकती है, लेकिन खरीफ मौसम में सबसे अधिक उत्पादन मिलता है।
खरपतवार, रोग और कीट नियंत्रण
खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 20-30 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें या पेंडीमेथालिन जैसे हर्बिसाइड का उपयोग। प्रमुख कीट: सफेद लट, दीमक, लीफ माइनर। रोग: टिक्का, उकटा, अफ्लाटॉक्सिन। एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) अपनाएं, जैसे ट्राइकोडर्मा का उपयोग।
हम आपको बता दें कि. खेत की तैयारीखेत तैयार करने के लिए गर्मियों में गहरी जुताई (मिट्टी पलटने वाले हल से) करें। मानसून आने पर 2-3 बार कल्टीवेटर से जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा और समतल बनाएं। दीमक से बचाव के लिए अंतिम जुताई में क्लोरोपायरिफॉस या क्विनलफॉस (25 किग्रा/हेक्टेयर) मिलाएं। उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों में रिज-फरो या ब्रॉड बेड एंड फरो (BBF) विधि अपनाएं ताकि जल निकासी अच्छी रहे। अच्छी सड़ी गोबर की खाद 10-15 टन/हेक्टेयर डालें।
इस संबंध में यह जानकारी होना अति आवश्यक हैं कि, मूंगफली को गहरी लेकिन अनियमित सिंचाई की जरूरत है। खरीफ में वर्षा पर्याप्त हो तो कम सिंचाई। रबी/जायद में 4-6 सिंचाई दें। फूल आने और फली बनने के समय (पेगिंग स्टेज) सिंचाई महत्वपूर्ण है। ड्रिप या फर्रे विधि अपनाएं ताकि पानी की बचत हो और जलभराव न हो।
