ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव आ गया है। 12 फरवरी को हुए आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी बहुमत हासिल कर लिया है। पार्टी के अध्यक्ष तारिक रहमान अब देश के अगले प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। यह जीत बीएनपी के लिए 20 साल बाद सत्ता में वापसी है, जबकि लगभग 35 साल बाद बांग्लादेश को एक पुरुष प्रधानमंत्री मिल रहा है। पिछले कई दशकों से शेख हसीना और खालिदा जिया जैसी महिला नेताओं का दौर रहा है, लेकिन अब तारिक रहमान के नेतृत्व में नया युग शुरू हो रहा है।
गौरतलब हैं कि, यह चुनाव बांग्लादेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। 2024 के जुलाई-अगस्त में छात्रों और युवाओं (जेन-जेड) के नेतृत्व वाले हिंसक जन-आंदोलन ने शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को उखाड़ फेंका था। हसीना को देश छोड़ना पड़ा और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने चुनाव कराए। अवामी लीग को प्रतिबंधित कर दिया गया था। कुल 300 सीटों वाली संसद (जातीय संसद) में से 299 सीटों पर मतदान हुआ (एक सीट पर स्थगित)। लगभग 12.7 करोड़ मतदाताओं में से मतदान प्रतिशत करीब 60.69% रहा। मतदान 4:30 बजे तक चला और तुरंत मतगणना शुरू हो गई।
जानकारी के लिए बता दें कि, तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों सीटों से जीत दर्ज की है। 60 वर्षीय तारिक रहमान, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के पुत्र हैं। उन्होंने 17-18 साल के निर्वासन (लंदन में) के बाद दिसंबर 2025 में देश वापसी की थी। उनकी मां खालिदा जिया की हालिया मृत्यु के बावजूद बीएनपी ने मजबूत प्रदर्शन किया। जीत की घोषणा के बाद तारिक रहमान ने कहा कि पार्टी कोई विजय रैली नहीं निकालेगी, बल्कि काम पर फोकस करेगी। उन्होंने अपनी मां की याद में शुक्रवार की नमाज के बाद विशेष दुआ मांगी। बीएनपी ने दो-तिहाई बहुमत से संवैधानिक सुधारों का वादा किया है, जिसमें संसद में सुधार, प्रधानमंत्री का कार्यकाल सीमित करना, महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाना और लोकतंत्र मजबूत करना शामिल है।
वही, इस दौरान चुनाव में कुछ हिंसा की घटनाएं हुईं। गोपालगंज, मुंशीगंज और कुमिला में पोलिंग बूथों के बाहर देसी बम विस्फोट हुए। खुलना में बीएनपी नेता की झड़प में मौत हुई। कुल 4-5 मौतों और कई घायलों की रिपोर्ट है। हालांकि, पुलिस ने कहा कि ज्यादातर घटनाएं नियंत्रण में हैं और चुनाव दिन पर कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई। लगभग 10 लाख सुरक्षा कर्मी तैनात थे।यह चुनाव बांग्लादेश के लिए स्थिरता की उम्मीद जगाता है। 2024 की क्रांति के बाद युवा मतदाताओं ने बीएनपी को चुना, जो बदलाव और स्थिरता चाहते थे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं भी आई हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान और बीएनपी को बधाई दी, कहा कि भारत लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश का समर्थन करेगा। अमेरिका ने भी ‘ऐतिहासिक’ जीत पर बधाई दी।
अब देखना यह होगा कि, तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना बांग्लादेश में नया दौर लाएगा। चुनौतियां हैं—आर्थिक स्थिरता, अल्पसंख्यक सुरक्षा, संवैधानिक सुधार और पड़ोसी देशों (खासकर भारत) से संबंध। बीएनपी को 2001-2006 के शासन की यादें हैं, जब भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, लेकिन अब नई शुरुआत का मौका है।
