कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बड़ा एक्शन लिया है। आयोग ने राज्य के सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ये सभी अधिकारी सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी (Assistant Electoral Registration Officers – AEROs) के रूप में SIR कार्य में तैनात थे। चुनाव आयोग ने इन पर गंभीर कदाचार, कर्तव्य में लापरवाही और वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। साथ ही, पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को निर्देश दिया गया है कि इन अधिकारियों के खिलाफ उनके संबंधित कैडर द्वारा तुरंत विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाए और इसकी रिपोर्ट बिना देरी के आयोग को सौंपी जाए।
गौरतलब हैं कि, यह कार्रवाई जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत की गई है, जो चुनाव आयोग को चुनावी प्रक्रिया में लगे अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार देती है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राज्य में 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए SIR अभियान चल रहा है। SIR प्रक्रिया नवंबर 2025 से शुरू हुई थी, जिसमें ड्राफ्ट रोल दिसंबर 2025 में प्रकाशित किया गया था। अंतिम प्रकाशन की तिथि अब 28 फरवरी 2026 तक बढ़ा दी गई है।
निलंबित अधिकारियों के नाम और क्षेत्र
चुनाव आयोग ने जिन सात अधिकारियों को निलंबित किया है, उनके नाम और संबंधित विधानसभा क्षेत्र इस प्रकार हैं:
- डॉ. सफी उर रहमान (शमशेरगंज/समसेरगंज, मुर्शिदाबाद) – सहायक निदेशक, कृषि विभाग और AERO।
- नीतीश दास (फरक्का, मुर्शिदाबाद) – राजस्व अधिकारी और AERO।
- डालिया राय चौधरी (मैनागुड़ी/मयनागुड़ी, जलपाईगुड़ी) – महिला विकास अधिकारी और AERO।
- शेख मुर्शिद आलम (सूती, मुर्शिदाबाद) – सहायक निदेशक, कृषि विभाग और AERO।
- सत्यजीत दास (कैनिंग पूर्व, दक्षिण 24 परगना) – संयुक्त ब्लॉक विकास अधिकारी और AERO।
- जॉयदीप कुंडू (कैनिंग पूर्व, दक्षिण 24 परगना) – मत्स्य विस्तार अधिकारी और AERO।
- देबाशीष बिस्वास (डेबरा, पश्चिम मेदिनीपुर) – संयुक्त ब्लॉक विकास अधिकारी और AERO।
कुल मिला कर चुनाव आयोग का यह कदम मतदाता सूची की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR का उद्देश्य कोई योग्य मतदाता छूटना नहीं और अयोग्य नाम हटाना है। इससे पहले भी आयोग ने कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की थी।
