कोलकाता।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ‘पीपुल्स मेनिफेस्टो’ लॉन्च किया है। पार्टी का दावा है कि यह घोषणापत्र जनता की राय और सुझावों के आधार पर तैयार किया जा रहा है, न कि ऊपर से थोपा गया। गांवों और शहरों में सुझाव अभियान चलाकर लोगों से उनकी समस्याएं और अपेक्षाएं जुटाई जा रही हैं। इसे एक जन आंदोलन के रूप में पेश किया गया है। घोषणापत्र मार्च 2026 के पहले सप्ताह में, संभवतः 10 मार्च से पहले जारी होने की उम्मीद है।
बीजेपी के इस घोषणापत्र में मुख्य मुद्दों में कट मनी (रिश्वत) और भ्रष्टाचार पर रोक, कानून-व्यवस्था की स्थापना, बंगाल में रोजगार सृजन, भयमुक्त समाज बनाना, सिंडिकेट राज का अंत, बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के सीधे लाभ योजनाएं, युवाओं के लिए रोजगार और राज्य से पलायन रोकना शामिल हैं। समाज के हर वर्ग को सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तर बंगाल के लिए अलग मिनी घोषणापत्र तैयार किया जा रहा है, जिसमें कूच बिहार से दार्जिलिंग तक के आठ जिलों के विशेष मुद्दों पर फोकस होगा। इसमें उत्तर बंगाल में आईआईटी स्थापना और युवाओं को 25,000 रुपये तक की सशर्त आर्थिक सहायता जैसे वादे चर्चा में हैं।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने बीजेपी के इस दांव को चुनावी जुमला करार दिया है। टीएमसी अपनी ‘युवा साथी’ जैसी वेलफेयर योजनाओं को आगे रख रही है, जिन्हें जनता से मजबूत समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है। टीएमसी का कहना है कि हम काम करते हैं, जबकि बीजेपी सिर्फ वादे करती है। जनता सब देख रही है और हमारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंच रहा है। टीएमसी अपने वेलफेयर मॉडल को बीजेपी के वादों के मुकाबले पेश कर रही है।
