नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और संभावित व्यवधानों के बीच घरेलू रसोई गैस (LPG) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (जिसे आमतौर पर ESMA कहा जाता है) के तहत आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 5 मार्च को जारी आदेश में सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे उत्पादन के दौरान प्राप्त प्रोपेन और ब्यूटेन स्ट्रीम्स का अधिकतम उपयोग LPG उत्पादन के लिए करें।
आदेश के अनुसार, रिफाइनरियों को प्रोपेन या ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल उत्पादों या अन्य डाउनस्ट्रीम डेरिवेटिव्स के निर्माण के लिए डायवर्ट, उपयोग, प्रोसेस, क्रैक, कन्वर्ट या अन्यथा नियोजित नहीं करने की सख्त मनाही है। उत्पादित LPG को केवल तीन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)—को उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है, ताकि इसे मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्राथमिकता से सप्लाई किया जा सके।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत में तेल शोधन क्षमता पर्याप्त होने के बावजूद LPG उत्पादन में कमी है। सरकार का उद्देश्य मध्य पूर्व संघर्ष से उत्पन्न संभावित गड़बड़ी से बचाव करते हुए घरेलू स्तर पर रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल के संदर्भ में सीधे जमाखोरी रोकने के अतिरिक्त उपायों का उल्लेख नहीं है, लेकिन समग्र ईंधन नियंत्रण के तहत यह कार्रवाई की गई है।
सरकार ने साथ ही घरेलू LPG सिलेंडर रिफिल बुकिंग के नियम में बदलाव कर एक सिलेंडर डिलीवरी के बाद अगली बुकिंग 21 दिनों के बजाय 25 दिनों के अंतराल पर करने की अनुमति दी है, जिससे जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग को और प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
