नई दिल्ली। इस बार प्याज का उत्पादन पिछले साल से 27 प्रतिशत अधिक होने का अनुमान है। बागवानी फसलों के पूर्वानुमान ने प्याज किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खरीफ सीजन का प्याज अभी भी किसानों के पास और मंडियों में भरा पड़ा है, जबकि रबी सीजन की नई फसल आने वाली है।
निर्यात रुकने से भारतीय बाजार में कीमतों पर असर पड़ रहा है। खाड़ी देशों में प्याज का एक्सपोर्ट बंद हो गया है, जिससे बंपर स्टॉक जमा हो रहा है। एक्सपोर्ट पॉलिसी की खामियों ने विदेशी खरीदारों को भगा दिया है। महाराष्ट्र में प्याज की आवक बढ़ने से भाव और गिर सकते हैं।
जय किसान फार्मर्स फोरम, महाराष्ट्र के विभागीय अध्यक्ष निवृत्ती न्याहारकर ने कहा कि जब तक ईरान और अमेरिका की लड़ाई चलेगी, तब तक प्याज किसानों की सांस अटकी रहेगी। महाराष्ट्र में रबी प्याज पूरे प्रदेश में और खरीफ प्याज नासिक में अधिक बोया जाता है। आने वाले दिनों में पूरे महाराष्ट्र का प्याज बाजार में आएगा, जिससे कीमतें एकदम गिरेंगी।
प्याज का उत्पादन खर्च 20 रुपये आता है, जबकि भाव 5 से 10 रुपये मिल रहे हैं। किसानों को लागत का आधा भी नहीं मिल रहा है। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले ने कहा कि सरकार को बढ़ते उत्पादन को अवसर मानकर किसान हितैषी निर्यात नीति बनानी चाहिए, ताकि किसानों को सही भाव मिल सकें।
विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो के कारण गर्मी बढ़ने से दक्षिण भारत की उपज देर से निकलेगी। बांग्लादेश में उत्पादन कम होने की आशंका है, जबकि पाकिस्तान की सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि, युद्ध बंद होने तक निर्यात में सुधार की उम्मीद कम है।
