पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे। राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद एमएलसी पद से इस्तीफा देना अनिवार्य है। 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद 14 दिनों के भीतर इस्तीफा जरूरी है, अन्यथा सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाएगी। नीतीश कुमार ने दिल्ली की राजनीति करने का फैसला किया है।
उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। संविधान के अनुसार, कोई व्यक्ति बिना विधानसभा सदस्यता के भी छह महीने तक मुख्यमंत्री रह सकता है। नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्यता बनाए रखते हुए इस प्रावधान का लाभ ले सकते हैं। उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी के चयन को लेकर भाजपा और जेडीयू के बीच चर्चा चल रही है।
जेडीयू का कहना है कि उत्तराधिकारी नीतीश कुमार की पसंद का होना चाहिए। पार्टी सहयोगी दलों लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (धर्मनिरपेक्ष) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा का विश्वास बनाए रखने वाला नेता चाहती है। जेडीयू सामाजिक गठबंधन को बिगड़ने नहीं देना चाहती और गठबंधन में केवल चेहरे का नहीं, रणनीति का बदलाव चाहती है।
भाजपा को तुरंत उत्तराधिकारी पर फैसला करना होगा। सम्राट चौधरी को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। जेडीयू के कुछ नेता निशांत कुमार में मुख्यमंत्री बनने के गुण देखते हैं। दोनों दलों के बीच शर्तों और शर्तों पर बातचीत जारी है, जिसमें मंत्रिमंडल वितरण और अध्यक्ष पद जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। नीतीश कुमार से जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं ने मुलाकात की है।
