नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जे को अपनी पसंदीदा चीज बताया है। उन्होंने कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान बचेगा ही नहीं। ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि वे ईरान के खार्ग द्वीप पर भी कब्जा कर सकते हैं।ट्रम्प ने कहा, “ईरान के तेल पर कब्जा मेरी पसंदीदा चीज है।” उन्होंने आगे चेतावनी दी कि यदि ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हुआ तो “ईरान ही नहीं बचेगा”। ट्रम्प के इन बयानों के बीच ईरान में पावर ग्रिड पर हमले की खबरें आई हैं, जिससे तेहरान समेत कई इलाकों में बिजली गुल हो गई।
तेहरान में विरोध प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने “अल्लाहु अकबर” के नारे लगाए। ट्रम्प के बयान ईरान के साथ तनाव के बीच आए हैं, हालांकि लेख में समझौता न होने की स्थिति में ईरान के अस्तित्व पर उनके विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त किए गए हैं।(नोट: उपलब्ध शीर्षक और लिंक के आधार पर ट्रम्प के बयान मुख्य रूप से तेल कब्जे, खार्ग द्वीप और समझौते की चेतावनी तक सीमित हैं। पावर ग्रिड हमला और प्रदर्शन संबंधी तथ्य शीर्षक में उल्लिखित हैं।)
तेल संसाधनों पर कब्जे की खुली बात
डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने बयान में साफ कहा, “ईरान के तेल पर कब्जा मेरी पसंदीदा चीज है।” यह बयान न केवल उनकी रणनीतिक सोच को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि अमेरिका ईरान के ऊर्जा संसाधनों को लेकर कितना गंभीर है। ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में से एक है और उसके पास विशाल तेल भंडार मौजूद हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी रूप में ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण की कोशिश की जाती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा। इससे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसका प्रभाव भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
समझौता न होने पर कड़ी चेतावनी
ट्रम्प ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं होता है, तो परिणाम बेहद गंभीर होंगे। उन्होंने कहा, “अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान ही नहीं बचेगा।” इस तरह की चेतावनी को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने काफी गंभीरता से लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान अमेरिका की ओर से दबाव की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिससे ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इस तरह की कठोर भाषा से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
डोनाल्ड ट्रम्प का यह बयान एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव को उजागर करता है। तेल संसाधनों पर कब्जे की इच्छा, खार्ग द्वीप का जिक्र और समझौता न होने पर दी गई कड़ी चेतावनी से यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
