नई दिल्ली। घरेलू एलपीजी सिलेंडर केवल रसोई में खाना बनाने के लिए ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं। सरकार द्वारा सब्सिडी दिए जाने वाले इन सिलेंडरों का मकसद आम लोगों को सस्ती दर पर रसोई गैस उपलब्ध कराना है। इन्हें होटल, रेस्तरां, ढाबा या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल करना गैरकानूनी माना जाता है।
कुछ शहरों में व्यावसायिक एलपीजी की कमी के चलते कई दुकानदार और व्यवसायी घरेलू सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन यह ‘सब्सिडी वाले एलपीजी का डायवर्जन’ या ‘मिसयूज’ माना जाता है। एलपीजी की आपूर्ति और वितरण को एसेंशियल कमोडिटी एक्ट, 1955 और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) ऑर्डर, 2000 के तहत नियंत्रित किया जाता है।
यदि कोई व्यक्ति घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग करते पकड़ा जाता है तो सिलेंडर और गैस कनेक्शन जब्त किया जा सकता है। गैस एजेंसी कनेक्शन रद्द भी कर सकती है। गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज की जाती है और अदालत में मुकदमा चलता है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है। साथ में जुर्माना भी लगाया जा सकता है। दोहराए जाने वाले अपराधों में दुकान या होटल बंद करने के आदेश भी दिए जा सकते हैं।
गैस एजेंसी और डिलीवरी कर्मी भी यदि इसमें शामिल पाए जाते हैं तो उन्हें दंडित किया जा सकता है। घरेलू सिलेंडर व्यावसायिक उपयोग के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं, इसलिए इससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।
aajtak.inनियमों का पालन न करने से न केवल कानूनी परेशानी हो सकती है, बल्कि भविष्य में गैस आपूर्ति भी प्रभावित रह सकती है। इसलिए केवल निर्धारित घरेलू उपयोग के लिए ही एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल करना चाहिए।
