असम। असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान गुरुवार 9 अप्रैल 2026 को सुबह 7 बजे शुरू हो गया। मतदान शाम 6 बजे तक चलेगा। असम में सभी 126 सीटों, केरल में 140 सीटों और पुडुचेरी में 30 सीटों के लिए एकल चरण में वोटिंग हो रही है। मतगणना 4 मई 2026 को होगी।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान केंद्रों पर लोग पहुंचने लगे हैं और मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है।तीनो राज्यों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। हजारों पुलिसकर्मी और केंद्रीय बल तैनात हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को ईवीएम की जानकारी दी गई। असम में 722, केरल में 883 और पुडुचेरी में 294 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। मतदान जारी है और मतदाता अपने-अपने केंद्रों पर पहुंच रहे हैं।
तीन राज्यों में चुनावी तस्वीर
तीनों राज्यों में चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है। असम में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि केरल में 883 और पुडुचेरी में 294 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। असम में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ दल और विपक्षी गठबंधनों के बीच है, वहीं केरल में परंपरागत रूप से वाम मोर्चा और कांग्रेस नीत गठबंधन के बीच टक्कर रहती है। पुडुचेरी में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है।
चुनाव आयोग की भूमिका
भारतीय लोकतंत्र में चुनाव आयोग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। Election Commission of India ने इस चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं।
चुनाव आयोग ने आचार संहिता के पालन से लेकर मतदान केंद्रों की व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और मतगणना की प्रक्रिया तक हर स्तर पर सख्ती बरती है। आयोग ने मतदाताओं को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए, जिससे मतदान प्रतिशत में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
इसके अलावा, दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे हर वर्ग के मतदाता आसानी से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
चुनाव परिणामों का विश्लेषण
चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे, लेकिन शुरुआती रुझानों और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर विश्लेषकों ने अपनी राय देना शुरू कर दिया है।
असम में सत्तारूढ़ सरकार के कामकाज, विकास योजनाओं और नेतृत्व के आधार पर चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। वहीं विपक्ष भी बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच सक्रिय रहा है।
केरल में परंपरागत सत्ता परिवर्तन का रुझान इस बार भी देखने को मिल सकता है या नहीं, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। पुडुचेरी में गठबंधन की राजनीति और स्थानीय मुद्दे निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, इन तीनों राज्यों के चुनाव परिणाम राष्ट्रीय राजनीति पर भी प्रभाव डाल सकते हैं, खासकर आगामी लोकसभा चुनावों के संदर्भ में।
असम, केरल और पुडुचेरी में हो रहा यह विधानसभा चुनाव भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है। शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए किए गए प्रयास सराहनीय हैं।मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी और चुनाव आयोग की सतर्कता इस प्रक्रिया को और भी विश्वसनीय बनाती है। अब सभी की निगाहें 4 मई को आने वाले परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि इन राज्यों की सत्ता किसके हाथों में जाएगी।
