नई दिल्ली: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को अक्षय फल देने वाला दिन माना जाता है। इस साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किए गए दान, तप और शुभ कार्यों का फल अनंत काल तक बना रहता है। यह दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त है।
वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने सत्संग के दौरान बताया कि अक्षय तृतीया पर अन्न, जल या धन का दान तो लोग करते ही हैं, लेकिन नामजप का दान इन सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि अगर जिह्वा से निरंतर राधा-राधा या प्रभु का नाम निकल रहा है और वह ध्वनि किसी दुखी व्यक्ति के कान में पड़ती है, तो वह उसके जीवन का अंधेरा दूर कर सकती है। यही सबसे बड़ा दान है।
महाराज जी ने बताया कि अगर आर्थिक कारणों से सोना या चांदी नहीं खरीद पा रहे हैं, तो इस दिन जौ खरीदना या दान करना भी सोने के समान फल देता है। साथ ही, मिट्टी के घड़े में जल भरकर किसी प्यासे को पिलाना अक्षय पुण्य की श्रेणी में आता है।प्रेमानंद महाराज ने अक्षय तृतीया पर नामजप की निरंतरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस दिन जितना हो सके भगवान के नाम का कीर्तन करें, ताकि आसपास का वातावरण भी सकारात्मक और भक्तिमय हो जाए।
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी जिह्वा से निरंतर “राधा-राधा” या भगवान के किसी भी नाम का जाप करता है और वह ध्वनि किसी दुखी, पीड़ित या निराश व्यक्ति के कानों तक पहुंचती है, तो वह उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। यह केवल एक ध्वनि नहीं, बल्कि दिव्य ऊर्जा का संचार है, जो व्यक्ति के मन के अंधकार को दूर कर सकता है। इस प्रकार का नामजप दूसरों के जीवन में आशा और शांति का संचार करता है, इसलिए इसे सबसे बड़ा दान कहा गया है।
