नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का नया दौर शुरू हो रहा है। 20 अप्रैल 2026 से अमेरिका में होने वाली इस चर्चा में टैरिफ को लेकर बड़े बदलाव की संभावना है। फरवरी 2026 में स्थगित हुई बातचीत के बाद यह पहली औपचारिक मुलाकात होगी।
मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन के नेतृत्व में करीब एक दर्जन भारतीय अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल तीन दिनों तक अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत करेगा। इस दल में वाणिज्य, सीमा शुल्क और विदेश मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को गैर-कानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद ट्रंप सरकार ने 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का समान टैरिफ लगा दिया, जिससे भारत को पहले मिल रही छूट प्रभावित हुई है।
7 फरवरी 2026 को जारी बेसिक इंफ्रा के तहत भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया था। इसमें रूसी तेल खरीद से जुड़े 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ हटाने का प्रावधान भी शामिल था। बदले में भारत ने अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, कृषि आयात, मेवे, फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट पर व्यापक छूट दी थी। भारत ने अगले पांच वर्षों में ऊर्जा उत्पादों, विमानों, प्रौद्योगिकी और कोकिंग कोयले समेत 500 अरब डॉलर तक के अमेरिकी सामान खरीदने का इरादा भी जताया था।
अब समान टैरिफ व्यवस्था के कारण भारत का तुलनात्मक लाभ कम होने से समझौते पर पुनर्विचार हो रहा है। बातचीत में अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत चल रही दो जांचों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है, जिन्हें भारत ने खारिज कर दिया है। पिछले वित्त वर्ष में भारत का अमेरिका को निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 52.9 अरब डॉलर रहा। इससे व्यापार अधिशेष 34.4 अरब डॉलर रह गया। बेसिक ट्रेड एग्रीमेंट पर अभी हस्ताक्षर बाकी हैं।
