नई दिल्ली।देशभर में लगातार बढ़ते तापमान और संभावित लू (हीटवेव) के खतरे को देखते हुए कृषि-मौसम विशेषज्ञों और मौसम विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। इस समय उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में इसके और तीव्र होने की संभावना जताई जा रही है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि कई क्षेत्रों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे खेती और फसलों पर गंभीर असर पड़ सकता है।देशभर में बढ़ते तापमान और संभावित लू के असर को देखते हुए कृषि-मौसम विशेषज्ञों ने किसानों के लिए विशेष सलाह जारी की है
बढ़ती गर्मी का खेती पर असर
गर्म और शुष्क मौसम का सीधा असर फसलों की वृद्धि और उत्पादन पर पड़ता है। अत्यधिक तापमान के कारण पौधों में नमी तेजी से कम हो जाती है, जिससे उनकी वृद्धि रुक सकती है या फसल पूरी तरह खराब भी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान बढ़ने पर कई प्रमुख फसलों की पैदावार प्रभावित होने लगती है।
इसके अलावा, तेज गर्मी के कारण मिट्टी की नमी तेजी से समाप्त होती है और सिंचाई की आवश्यकता बढ़ जाती है। कई जगहों पर जल स्तर भी घट रहा है, जिससे किसानों के लिए सिंचाई करना चुनौतीपूर्ण बन रहा है। कर्नाटक जैसे क्षेत्रों में जलाशयों का स्तर गिरने के कारण किसानों को पानी की अधिक खपत वाली फसलें न लगाने की सलाह दी गई है।
लू और हीटवेव का खतरा
देश के कई राज्यों में लू की स्थिति बन रही है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पहले से ही हीटवेव की स्थिति बनी हुई है और इसके पूर्वी भारत तक फैलने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार गर्मी सामान्य से अधिक तीव्र हो सकती है। अनुमान है कि अप्रैल के अंत तक देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान 43-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
देश में बढ़ती गर्मी और लू का खतरा कृषि क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में किसानों के लिए जरूरी है कि वे समय रहते विशेषज्ञों द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करें और फसलों को बचाने के लिए उचित कदम उठाएं। सही रणनीति और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर ही इस संकट से निपटा जा सकता है और फसल उत्पादन को सुरक्षित रखा जा सकता है।
