नई दिल्ली:विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि अल-नीनो की स्थिति मई से जुलाई के बीच विकसित हो सकती है। यह पहले से अनुमानित समय से पहले है। संगठन के अनुसार, सभी मॉडल अल-नीनो के बनने की पुष्टि कर रहे हैं और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है।
अल-नीनो एक जलवायु घटना है जो हर 2 से 7 वर्ष में होती है और आमतौर पर 9 से 12 महीने तक रहती है। इससे वैश्विक तापमान बढ़ता है तथा वर्षा के पैटर्न प्रभावित होते हैं। भारत और दक्षिण एशिया में इसके कारण कुछ क्षेत्रों में कम वर्षा या सूखे की स्थिति बन सकती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के जलवायु पूर्वानुमान प्रमुख विल्फ्रान माफौमा ओकिया ने कहा, “मई-जून-जुलाई के दौरान जमीन का तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। यानी लगभग हर जगह ज्यादा गर्मी पड़ सकती है।”
इस घटना से कृषि, जल प्रबंधन, ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्रों पर असर पड़ने की आशंका है। भारत मौसम विभाग ने भी इस वर्ष औसत से कम वर्षा की भविष्यवाणी की है। हिंदुकुश हिमालय क्षेत्र में इस वर्ष बर्फ की परत औसत से 27.8 प्रतिशत कम है, जो पिछले 20 वर्षों में सबसे कम स्तर है। इससे नदियों के जल स्तर और लगभग दो अरब लोगों की जल सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
WMO ने समय पर तैयारी के लिए ऐसे पूर्वानुमानों की जरूरत पर जोर दिया है। शुरू में तटस्थ स्थिति से अब मॉडल अल-नीनो की ओर इशारा कर रहे हैं। समुद्री सतह का तापमान भूमध्य रेखीय प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ रहा है, जो अगले महीने अल-नीनो के बनने का संकेत दे रहा है।
