नई दिल्ली। मई-जून के गर्मी के मौसम में किसान कुछ चुनिंदा सब्जियों की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। इस सीजन में कद्दू, लौकी, तरोई, भिंडी और करेला जैसी फसलें तगड़ा रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं।इन फसलों की बाजार में साल भर मांग बनी रहती है, लेकिन मई-जून में इनकी आवक कम होने से दाम काफी ऊंचे रहते हैं। गर्मियों में शादी-ब्याह और पार्टियों का मौसम होता है, जिसमें इन सब्जियों की खपत बढ़ जाती है। बेल वाली सब्जियां जैसे कद्दू, लौकी और तरोई इस दौरान अच्छा रिटर्न दे सकती हैं।
भिंडी और करेला भी इस सीजन में किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती हैं। अच्छी क्वालिटी की हाइब्रिड किस्मों का चुनाव करने पर पैदावार उम्मीद से ज्यादा मिल सकती है। इन फसलों को कम पानी और थोड़ी देखभाल के साथ उगाया जा सकता है, जिससे किसानों का बैंक बैलेंस तेजी से बढ़ सकता है।किसानों को सलाह दी गई है कि मई-जून की भीषण गर्मी में सही प्लानिंग के साथ इन फसलों का चुनाव करें। इससे खेती को मुनाफे का बिजनेस बनाया जा सकता है।
बेल वाली सब्जियां बनेंगी कमाई का जरिया
कद्दू, लौकी और तरोई जैसी बेल वाली सब्जियां गर्मी के मौसम में काफी लाभदायक मानी जाती हैं। ये फसलें तेजी से बढ़ती हैं और कम समय में उत्पादन देना शुरू कर देती हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती और थोड़ी देखभाल में ही अच्छी पैदावार मिल जाती है। खेत में इन बेलों को सहारा देने के लिए मचान या ट्रेलिस सिस्टम का इस्तेमाल करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।
हाइब्रिड किस्मों का चयन बढ़ाएगा उत्पादन
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान बेहतर उत्पादन चाहते हैं, तो उन्हें पारंपरिक बीजों की बजाय हाइब्रिड किस्मों का चयन करना चाहिए। हाइब्रिड बीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है और ये विपरीत मौसम में भी अच्छी उपज देते हैं।
कद्दू की हाइब्रिड किस्मों में ‘पुष्पा’, ‘अरका चंदन’ और ‘काशी उज्ज्वल’ अच्छी मानी जाती हैं। लौकी के लिए ‘पूसा नवीन’, ‘अरका बहार’ और ‘काशी गंगा’ लोकप्रिय हैं। तरोई में ‘पूसा नसदार’ और ‘अरका सुमन’ बेहतर विकल्प हैं। भिंडी की बात करें तो ‘पूसा सावनी’, ‘अरका अनामिका’ और ‘वर्षा उपहार’ किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। वहीं करेला के लिए ‘पूसा दो मौसमी’, ‘प्रिया’ और ‘अरका हरित’ किस्में उच्च उत्पादन के लिए जानी जाती हैं।
इन हाइब्रिड किस्मों के इस्तेमाल से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं।
गर्मी में सिंचाई की सही तकनीक जरूरी
मई-जून की तेज गर्मी में फसलों की सिंचाई एक बड़ी चुनौती होती है। यदि सही तरीके से पानी नहीं दिया गया, तो फसल को नुकसान हो सकता है। ऐसे में आधुनिक सिंचाई तकनीकों का उपयोग किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) इस मौसम में सबसे कारगर तरीका माना जाता है। इसमें पौधों की जड़ों तक सीधे पानी पहुंचाया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है और पौधों को पर्याप्त नमी मिलती रहती है। इसके अलावा, मल्चिंग तकनीक का उपयोग करके खेत की नमी को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है। मल्चिंग में फसल के आसपास प्लास्टिक या जैविक पदार्थ बिछाया जाता है, जिससे पानी का वाष्पीकरण कम होता है और खरपतवार भी नियंत्रित रहते हैं।
विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि वे सुबह जल्दी या शाम के समय सिंचाई करें, ताकि पानी का नुकसान कम हो और पौधों को अधिक लाभ मिल सके। साथ ही, नियमित अंतराल पर हल्की सिंचाई करना भारी सिंचाई से बेहतर माना जाता है।
कुल मिलाकर, मई-जून का यह गर्मी का मौसम किसानों के लिए चुनौती के साथ-साथ अवसर भी लेकर आता है। सही फसल चयन, हाइब्रिड बीजों का उपयोग और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाकर किसान इस मौसम को मुनाफे के सुनहरे अवसर में बदल सकते हैं।
