नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देशभर में सीएनजी की कीमतों में चौथी बार बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल-डीजल के बाद अब सीएनजी के दाम भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा दिए गए हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में सीएनजी की नई कीमत 83.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।
15 मई के बाद से यह चौथी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को 2 रुपये, 18 मई को 1 रुपये और 23 मई को 1 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इन सभी बढ़ोत्तरियों को मिलाकर पिछले 11 दिनों में सीएनजी के दामों में कुल 6 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है। आज 26 मई से नई दरें लागू हो गई हैं।
सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में देखने को मिल सकता है, जहां ऑटो, टैक्सी, स्कूल वैन और प्राइवेट कारों में इसका व्यापक उपयोग होता है। ऑटो रिक्शा चालकों का कहना है कि बार-बार बढ़ रही कीमतों से उनकी रोजाना की कमाई प्रभावित हो रही है।
क्यों बढ़ रहे हैं CNG के दाम?
सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों को प्रभावित करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने का सीधा असर घरेलू ईंधन दरों पर पड़ता है।
यहां यह जानकारी दोते चले कि, सीएनजी की कीमत निर्धारण प्रक्रिया कई कारकों पर आधारित होती है। इसमें घरेलू गैस उत्पादन, आयातित एलएनजी (Liquefied Natural Gas) की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, ट्रांसपोर्ट लागत और टैक्स शामिल होते हैं।भारत में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियां जैसे इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL), महानगर गैस लिमिटेड (MGL) और अडानी टोटल गैस उपभोक्ताओं तक सीएनजी पहुंचाती हैं। इन कंपनियों को सरकार द्वारा निर्धारित गैस आवंटन और बाजार आधारित कीमतों के आधार पर दरें तय करनी पड़ती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सीएनजी कीमतों में लगातार वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। सार्वजनिक परिवहन महंगा होने पर इसका असर खाद्य पदार्थों, डिलीवरी सेवाओं और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर भी पड़ सकता है।पिछले कुछ वर्षों में सीएनजी को पेट्रोल और डीजल के मुकाबले सस्ता और पर्यावरण अनुकूल विकल्प माना जाता रहा है। इसी वजह से लाखों लोगों ने सीएनजी वाहन खरीदे थे। लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों से अब यह अंतर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने पर आने वाले महीनों में कीमतों में स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल उपभोक्ताओं को महंगे ईंधन का बोझ उठाना पड़ रहा है।
