नई दिल्ली। तलाकशुदा बेटी, मृत बेटी से बेहतर, बेटी के जन्म से माता पिता उसे नाजों से पालते हे फिर उसकी शादी करते हैं अगर किस्मत से उसकी शादी अच्छे धर मे हो जाती है तब तो ठिक है लेकिन अगर अच्छे धर में नही होती है तो मौत से बेहर है कि तलाक हो जाए क्योकि बेटी को मरा हुआ देखने से बेहर है ‘कि उसका तलाक हो जाए। ट्विशा शर्मा केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया हैं
हम आपको जानकारी दे दें कि, 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। उनके परिवार ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए हैं, जबकि ससुराल पक्ष का कहना है कि ट्विशा नशे की लत से परेशान थीं। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि आरोपियों के परिवार की पृष्ठभूमि को देखते हुए जांच प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।
ट्विशा के पति समर्थ सिंह पेशे से वकील हैं और उनकी मां गिरिबाला सिंह पूर्व जिला जज रह चुकी हैं। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कहा कि ‘तलाकशुदा बेटी, मृत बेटी से बेहतर होती है’। परिवार ने शुरुआती पोस्टमार्टम में चोटों की जांच न करने और अन्य कमियों का आरोप लगाया तथा AIIMS से स्वतंत्र मेडिकल जांच की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि अदालत और जांच एजेंसियों पर भरोसा रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी तरह की सार्वजनिक बयानबाजी से जांच प्रभावित हो सकती है। अदालत ने मीडिया संस्थानों से जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करने की अपील की ताकि तथ्यों से इतर किसी तरह का भ्रम न फैले।
ट्विशा शर्मा की मौत का मामला अब केवल एक आपराधिक जांच नहीं रह गया है, बल्कि यह समाज में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में CBI जांच की दिशा और उससे सामने आने वाले तथ्य इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेंगे।
फिलहाल पूरे देश की नजरें इस हाई-प्रोफाइल केस पर टिकी हैं। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि CBI जांच से उनकी बेटी को न्याय मिलेगा, जबकि दूसरी ओर आरोपित पक्ष खुद को निर्दोष बता रहा है। अब जांच एजेंसी की रिपोर्ट और अदालत की आगामी सुनवाई पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं।
