नई दिल्ली। घर के किचन गार्डन में दालचीनी का पौधा आसानी से लगाया जा सकता है। सही देखभाल और थोड़ी मेहनत से यह पौधा घर को खुशबूदार और हरा-भरा बना देता है तथा बाजार पर निर्भरता भी कम करता है।सुबह की चाय हो, मीठी खीर हो या सर्दियों का काढ़ा, दालचीनी की खुशबू हर चीज का स्वाद बढ़ा देती है। बाजार से खरीदने के बजाय इसे घर में उगाया जा सकता है। इससे न सिर्फ घर का आंगन महकेगा बल्कि बार-बार दालचीनी खरीदने का खर्च भी कम हो सकता है।
दालचीनी एक मसालेदार पौधा है जो गर्म और हल्के नमी वाले मौसम में अच्छी तरह बढ़ता है। भारत के कई हिस्सों में लोग अब इसे घरों में लगाने लगे हैं। इसे बहुत ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती। छोटे बालकनी गार्डन या छत पर गमले में भी इसकी खेती शुरू की जा सकती है।
दालचीनी उगाने के लिए अच्छे बीज या नर्सरी से छोटा पौधा लेना जरूरी है। कई लोग नर्सरी से छोटा पौधा खरीदकर लगाते हैं क्योंकि इससे पौधा जल्दी बढ़ता है। मिट्टी में गोबर की खाद या जैविक खाद मिलाना अच्छा माना जाता है। मिट्टी ऐसी होनी चाहिए जिसमें पानी ज्यादा देर तक जमा न रहे, अन्यथा पौधे की जड़ खराब हो सकती है।
घर में आसानी से लगाया जा सकता है पौधा
गार्डनिंग विशेषज्ञों का कहना है कि दालचीनी का पौधा बहुत ज्यादा जगह नहीं घेरता। इसे छोटे गमलों, बालकनी गार्डन या छत पर भी आसानी से लगाया जा सकता है। यही कारण है कि शहरी इलाकों में रहने वाले लोग भी इसे अपने घरों में उगाने लगे हैं।
दालचीनी का पौधा गर्म और हल्के नमी वाले मौसम में अच्छी तरह बढ़ता है। भारत के कई हिस्सों की जलवायु इसके लिए अनुकूल मानी जाती है। हालांकि पौधे को तेज धूप से कुछ हद तक बचाना जरूरी होता है।
पिछले कुछ वर्षों में शहरी क्षेत्रों में किचन गार्डन और ऑर्गेनिक गार्डनिंग का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग अपने घरों में धनिया, पुदीना, करी पत्ता, हल्दी और अदरक जैसे पौधों के साथ अब दालचीनी भी लगाने लगे हैं।
इस संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे स्तर पर की गई यह पहल पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है। इससे घर का वातावरण बेहतर होता है और लोगों को प्रकृति के करीब रहने का अवसर मिलता है।दालचीनी का पौधा न केवल घर को हरियाली और खुशबू देता है, बल्कि यह किचन गार्डन को भी खास बना सकता है। सही देखभाल के साथ इसे घर में आसानी से उगाया जा सकता है और लंबे समय तक इसका लाभ लिया जा सकता है।
