नई दिल्ली। लौकी की खेती के लिए सावन की शुरुआत से ठीक पहले खेत तैयार करना किसानों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। बाजार में साल भर लौकी की मांग बनी रहती है, लेकिन सावन के महीने में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है। पारंपरिक तरीकों की जगह उन्नत किस्मों और आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान कम लागत में बंपर उत्पादन ले सकते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित BRBG-65 किस्म बेहतर मुनाफे के लिए उपयुक्त है। इसके फल 32 से 35 सेंटीमीटर लंबे और 800 ग्राम से 1 किलो वजन के होते हैं, जो छोटे परिवारों में ज्यादा पसंद किए जाते हैं। यह किस्म गर्मी और बरसात दोनों मौसम के लिए उपयुक्त है तथा इसमें बीमारियों का खतरा बहुत कम होता है।
क्यों बढ़ जाती है सावन में लौकी की मांग?
सावन का महीना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सात्विक भोजन को प्राथमिकता देते हैं। लौकी को हल्की, सुपाच्य और पौष्टिक सब्जी माना जाता है, इसलिए इसकी मांग सामान्य दिनों की तुलना में अधिक हो जाती है।
मंडी व्यापारियों के अनुसार, सावन के दौरान लौकी की कीमतों में अक्सर बढ़ोतरी देखी जाती है। यदि किसान समय पर फसल तैयार कर लेते हैं, तो उन्हें बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना रहती है। यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ किसानों को सावन से पहले इसकी खेती शुरू करने की सलाह देते हैं।
लौकी की खेती में मचान विधि या ट्रेलिस सिस्टम को आधुनिक और प्रभावी तकनीक माना जाता है। इस विधि में बांस, लकड़ी या लोहे के खंभों तथा तारों की सहायता से एक ढांचा तैयार किया जाता है, जिस पर बेलों को चढ़ाया जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार, जब लौकी की बेलें जमीन पर फैलने के बजाय ऊपर की ओर बढ़ती हैं, तो फलों की गुणवत्ता बेहतर होती है। फल मिट्टी के सीधे संपर्क में नहीं आते, जिससे सड़न और अन्य नुकसान की संभावना कम हो जाती है।
