नई दिल्ली।आजकल बड़े खेतों की जरूरत के बिना भी स्ट्रॉबेरी की खेती संभव हो गई है। आधुनिक तकनीकों ने इस काम को आसान बना दिया है। बाजार और बड़े शहरों के कैफे में स्ट्रॉबेरी की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे इसके दाम ऊंचे रहते हैं। घर की छत, बालकनी या छोटे खाली स्थान पर भी इस लाल और रसीले फल की खेती करके अच्छी कमाई की जा सकती है।
हाइड्रोपोनिक्स और वर्टिकल फार्मिंग का तरीका अपनाकर बिना मिट्टी के स्ट्रॉबेरी उगाई जा सकती है। हाइड्रोपोनिक्स सिस्टम में पौधों को पोषक तत्वों से भरपूर पानी के माध्यम से पाला जाता है। वर्टिकल फार्मिंग में दीवार या स्टैंड पर पीवीसी पाइप या गमलों का उपयोग करके कम जगह में भी सैकड़ों पौधे लगाए जा सकते हैं। इस विधि में खरपतवार की समस्या नहीं होती और मौसम तथा कीटों का खतरा भी कम रहता है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली फसल तैयार होती है।
वर्टिकल फार्मिंग से कम जगह में ज्यादा उत्पादन
वर्टिकल फार्मिंग आधुनिक कृषि की एक और लोकप्रिय तकनीक है। इसमें पौधों को जमीन पर फैलाने के बजाय ऊंचाई में विभिन्न स्तरों पर लगाया जाता है। इसके लिए पीवीसी पाइप, स्टैंड, रैक या विशेष संरचनाओं का उपयोग किया जाता है।
इस पद्धति के जरिए छत, बालकनी या छोटे कमरे जैसी सीमित जगह में भी बड़ी संख्या में पौधे लगाए जा सकते हैं। स्ट्रॉबेरी जैसे पौधों के लिए यह तकनीक बेहद उपयोगी मानी जाती है क्योंकि पौधों को पर्याप्त प्रकाश और हवा मिलती है।
वर्टिकल फार्मिंग के कारण कम क्षेत्रफल में अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं, जिससे प्रति वर्ग फुट उत्पादन बढ़ जाता है। इसके अलावा फसल की निगरानी और रखरखाव भी आसान हो जाता है।
हाइड्रोपोनिक्स और वर्टिकल फार्मिंग जैसी आधुनिक तकनीकों ने स्ट्रॉबेरी की खेती को पहले से अधिक आसान और लाभदायक बना दिया है। कम जगह, कम पानी और नियंत्रित वातावरण में उच्च गुणवत्ता वाली फसल तैयार की जा सकती है। बढ़ती बाजार मांग और अच्छे दामों को देखते हुए यह खेती शहरी किसानों, युवाओं और कृषि उद्यमियों के लिए आय का आकर्षक स्रोत बनकर उभर रही है। सही तकनीकी जानकारी और उचित प्रबंधन के साथ बिना खेत के भी स्ट्रॉबेरी की खेती से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
